ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में 90 लाख लोगों ने किया ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 'No Kings Protest', 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत जैसे लगाए नारे

अमेरिका में विद्रोह: 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' के साथ ट्रंप के खिलाफ सड़क पर उतरे लाखों

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में 90 लाख लोगों ने किया ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 'No Kings Protest', 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत जैसे लगाए नारे

ईरान युद्ध, कड़ी अप्रवासन नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में अमेरिका के 50 राज्यों में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' तेज हो गया है। न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया। लॉस एंजेलिस में हिंसा के बाद पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। व्हाइट हाउस ने इन आंदोलनों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताकर खारिज कर दिया है।

अमेरिका। ईरान युद्व के बीच अमेरिका में एक बार फिर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अमेरिका के कई बड़े शहरों में ‘नो किंग्स प्रोटेस्ट’ के नाम से यह आंदोलन तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ संघर्ष, अप्रवासन से जुड़े कड़े कानून और बढ़ती महंगाई प्रमुख हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस सहित कई शहरों में शनिवार को दिनभर रैलियां और मार्च किया गया। वॉशिंगटन डीसी में Lincoln Memorial और National Mall के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां, पोस्टर और प्रतीकात्मक पुतले लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है और इसी के कारण आज पूरा विश्व हिंसा की आग में जलने को मजबूर हो गया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने “कोई राजा नहीं” जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए इमिग्रेशन एजेंसी का मजाक उड़ाने के लिए विशेष पोशाकें भी पहनीं।

हालांकि, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Los Angeles के डाउनटाउन क्षेत्र में स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। यहां प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने के बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस बार देशभर में लाखों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे और 50 राज्यों में हजारों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इससे पहले पिछले साल भी अमेरिका में दो चरणों में इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन प्रदर्शनों को खारिज किया और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। प्रशासन का कहना है कि इन आंदोलनों को वास्तविक जनसमर्थन हासिल नहीं है और इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

 

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