यूसीसी लागू करने के लिए पिछले दरवाजे का रास्ता नहीं अपनाएं भाजपा : संसद में लाए कानून, उमर ने कहा- इसे अलग-अलग राज्यों में क्यों कर रहे है आप
भाजपा को संसद में पेश करना चाहिए विधेयक
जम्मू। कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए 'पिछले दरवाजे' का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित की इस घोषणा के बाद यह बात कही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2029 तक राजग शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि इस कानून को अलग-अलग राज्यों के जरिए चुनिंदा तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय संसद में लाया जाना चाहिए। उन्होंने श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, अगर आपके पास संख्या बल है, तो इसे संसद में लाएं। आप इसे अलग-अलग राज्यों में क्यों कर रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग राज्य सरकारों के जरिए यूसीसी को आगे बढ़ाने के कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के भीतर मतभेदों की ओर भी इशारा किया और दावा किया कि जनता दल (यूनाइटेड) ने बिहार में इसे लागू करने का विरोध किया है। उन्होंने पूछा, अगर उनके अपने ही लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं, तो वे कैसे कह सकते हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए?
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को संसद में एक विधेयक पेश करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि क्या उनके पास कानून पारित कराने के लिए जरूरी संख्या बल है। उन्होंने कहा, उन्हें पिछले दरवाजे का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, उन्हें संसद में बिल लाना चाहिए और देखना चाहिए कि उनके पास संख्या बल है या नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि संसद में यह कानून पारित हो पाएगा, क्योंकि भाजपा के कुछ सहयोगियों द्वारा इसका विरोध किए जाने की रिपोर्टें हैं। विपक्ष के इस आरोप पर कि भाजपा सांप्रदायिक उद्देश्यों के लिए यूसीसी का इस्तेमाल कर रही है, उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू कानून को सार्वभौमिक नहीं कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा, अगर यह पूरे देश पर लागू नहीं होता है, तो यह सार्वभौमिक नहीं है। पूरा देश भाजपा शासित राज्य नहीं है। ऐसे कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां भाजपा का शासन नहीं है। इसलिए, अगर आप इसे केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू करते हैं, तो यह सार्वभौमिक नहीं है। और इस तरह की चीज का फ़ैसला अलग-अलग राज्यों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। इसका फ़ैसला पूरे देश को करना होगा। पूरे देश का प्रतिनिधित्व राज्यों में नहीं, बल्कि संसद में होता है। कानून को संसद में आने दें। उमर ने कहा कि यह कानून संसद में नहीं आया है। जब उमर से पाकिस्तान का नाम लिए बिना पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने वाले ब्रिक्स घोषणापत्र के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार, खासकर विदेश मंत्रालय को ध्यान देना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह घोषणापत्र भारत की विदेश नीति की एक कामयाबी है।
उन्होंने कहा, देखिए, पहलगाम आतंकी हमले की निंदा होना ही अपने आप में एक बड़ी बात है। जरा देखिए कि उस कमरे में पाकिस्तान के कितने सहयोगी देश मौजूद थे। इसलिए, पहलगाम का नाम लिया जाना ही हमारी विदेश नीति की कामयाबी है। उमर ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति के बारे में दूसरे देशों की तारीफ़ या आलोचना को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देनी चाहिए, देश की विदेश नीति उसके अपने हितों और फ़ैसलों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने चीन द्वारा भारत की विदेश नीति की तारीफ़ किए जाने के सवाल पर कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति की मंजूरी के लिए दूसरे देशों की ओर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हम दूसरे देशों से प्रमाण पत्र क्यों मांगें, ऐसी चीजों में खतरा यह है कि अगर कल चीन हमारी विदेश नीति के खिलाफ कुछ कह दे, तो आप क्या करेंगे। उन्होंने आगे कहा, इसलिए मुझे नहीं लगता कि हमें दूसरे देशों की बातों को-चाहे वे अच्छी हों या बुरी-बहुत ज्यादा अहमियत देनी चाहिए। क्योंकि हम अपनी मर्जी से चीजें नहीं चुन सकते। उन्होंने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि दूसरे देश उसकी विदेश नीति में दखल न दें।
उमर ने कहा, अगर भविष्य में कोई विरोध होता है, तो हम कहेंगे कि हमारी नीति में दखल न दें। जब वे हमारी तारीफ़ करते हैं, तो हम कहते हैं कि यह अच्छी बात है। हम न तो उनकी तारीफ़ सुनना चाहते हैं और न ही उनका विरोध। उन्होंने कहा, Þहमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हमें उसी पर ध्यान देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती कम करने की खबर का भी स्वागत किया और कहा कि तनाव कम होने से सीमा के पास रहने वाले लोगों को फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा, सीमा रेखा या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने वाला कोई भी कदम अच्छा है। खासकर उन लोगों के लिए जो इसके पास रहते हैं। हम जानते हैं कि एलओसी या एलएसी के पास रहना लोगों के लिए कितना मुश्किल है। इसलिए, अगर एलएसी पर तैनाती कम करने वाला कोई कदम उठाया जाता है, तो यह एक अच्छा कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ एलओसी पर भी इसी तरह का सुधार देखने को मिलेगा।

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