यूएनआई के दिल्ली दफ्तर को बिना पूर्व नोटिस के खाली करने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा, कहा-पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार लोकतंत्र की हत्या
लोकतंत्र पर हमला: UNI दफ्तर खाली कराने पर कांग्रेस का प्रहार
कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने दिल्ली में न्यूज़ एजेंसी UNI के दफ्तर को बिना नोटिस जबरन खाली कराने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार बताया। 300 पुलिसकर्मियों के बल प्रयोग और आनन-फानन में की गई इस कार्रवाई को उन्होंने अराजकता की श्रेणी में रखा है।
देवरिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा है कि देश की प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यूएनआई)के दिल्ली दफ्तर को बिना पूर्व नोटिस दिये बगैर खाली कराना और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार लोकतंत्र की हत्या है। अखिलेश प्रताप सिंह ने शनिवार को यहां यूनीवार्ता से कहा, शुक्रवार शाम एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के दिल्ली परिसर को दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ पत्रकारों कर्मचारियों पर बल प्रयोग करके खाली कराने का समाचार सुनकर हैरान हूं।
देश की सर्वश्रेष्ठ संवाद समिति के दफ्तर को बिना नोटिस दिये अचानक भारी पुलिस फोर्स के साथ खाली कराना लोकतंत्र की हत्या है। यूएनआई न्यूज रूम से पत्रकारों को जबरिया बाहर करना अराजकता की श्रेणी हो सकती है। गौरतलब है कि, पिछले कई दशकों से संसद मार्ग के पास 9 रफी मार्ग पर स्थित परिसर से यूएनआई का संचालन हो रहा था।
दिल्ली उच्च न्यायालय में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा आवंटन रद्द होने के बाद लंबित याचिका पर शुक्रवार को फैसला आने के बाद कुछ घंटों बाद आनन फानन में कुछ सरकारी अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 300 जवानों एवं अफसरों और कुछ वकीलों के साथ परिसर में घुस आये और वहां कार्यरत पत्रकारों एवं अन्य कर्मचारियों से तुरंत न्यूजरूम खाली कर परिसर से बाहर जाने का दबाव डालने लगे जबकि उस समय खबरें प्रेषित करने का काम सबसे ज्यादा था।

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