कांग्रेस ने लिया केंद्र को आड़ेहाथों: FCRA के मौजूदा विधेयक को स्वीकार करने से इंकार, चर्चा से बच रही सरकार

सरकार गैर-सरकारी संगठनों को बना रही निशाना

कांग्रेस ने लिया केंद्र को आड़ेहाथों: FCRA के मौजूदा विधेयक को स्वीकार करने से इंकार, चर्चा से बच रही सरकार
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक को दमनकारी बताते हुए विपक्ष ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बना रही है। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि विधेयक को इस रूप में पारित नहीं होने दिया जाएगा।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक के मौजूदा स्वरूप को दमनकारी बताते हुए उसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि पार्टी और पूरा विपक्ष इसे वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा और सब मिलकर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष एफसीआरए विधेयक को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े संगठनों के लिए अलग व्यवस्था और अन्य गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए अलग नियम रखने की सोच स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि पार्टी इस 'दमनकारी' विधेयक को पारित नहीं होने देगी।

वेणुगोपाल ने कहा "लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एफसीआरए विधेयक को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। पार्टी और पूरे विपक्ष का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि एफसीआरए विधेयक को उसके मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आरएसएस सब कुछ कर सकता है, जबकि अन्य गैर-सरकारी संगठनों के लिए अलग नियम हों, ऐसी सोच स्वीकार्य नहीं है। हम इस दमनकारी विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे और इसे किसी भी कीमत पर पारित नहीं होने देंगे।"

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले से ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चर्चा की मांग कर रही है क्योंकि पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री को छात्रों पर कथित अत्याचार और गोलीबारी के मुद्दे पर सदन में आकर बयान देना चाहिए। संसद बहस और चर्चा का मंच है, लेकिन सरकार चर्चा से बचते हुए विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है।

इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता और विपक्ष की आवाज नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों पर कथित हमले, ई-20 मुद्दे, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने तथा राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे जनहित के मुद्दे संसद में उठा रहा है, लेकिन सरकार चर्चा कराने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर अपना वक्तव्य दें। उन्होंने कहा कि चर्चा से ही समाधान निकलेगा और सदन में उपस्थित न होकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद का अपमान कर रहे हैं।

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