राज्यसभा में खरगे और नड्डा के बीच तीखी बहस: विपक्ष ने किया हंगामा, कांग्रेस समेत कई दलों ने किया वॉकआउट
विपक्ष बहस से भाग रहा
नई दिल्ली। राज्य सभा में बुधवार अपराह्न एक विधायी चर्चा के दौरान सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और सदन के नेता जेपी नड्डा के बीच तीखा संवाद हुआ और कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य शोर शराबा करते हुए सदन से बाहर चले गये। खरगे ने सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम के समक्ष उल्लिखित सहकारिता क्षेत्र के विधेयक को प्रस्तुत किये जाने के समय उनकी सदन में अनुपस्थिति का मामला उठाना चाहा। इस पर नड्डा ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह कर रहे हैं और विपक्ष बहस से भागना चाहता है।
अपराह्न दो बजे के सत्र में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में चर्चा और अनुमोदन प्रस्ताव रखने के लिए सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल के खड़े होते ही कांग्रेस समेत कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उप सभापति हरिवंश ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू के अनुरोध का हवाला देते हुए केरल (नाम परिवर्तन विधेयक 2026 से पहले सहकारिता संबंधी इस विधेयक पर पहले चर्चा के लिए प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी।
हरिवंश ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए विपक्ष की आरे से तृणमूल कांग्रेस की सदस्या ममता ठाकुर का नाम पुकारा। ठाकुर ने विधेयक पर बोलने की बजाय दिल्ली में युवा आंदोलनकारियों पर गृहमंत्री शाह के स्पष्टीकरण की मांग उठानी चाहिए लेकिन उपसभापति ने इसकी अनुमति नहीं दी। अगले वक्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य राम राव सखाराम वडकुते के भाषण के दौरान खरगे खड़े हो गये।
उपसभापति ने प्रतिपक्ष के नेता का सम्मान' जताते हुए उन्हें बोलने की अनुमति दे दी। खरगे ने सदन में शाह की लगातार अनुपस्थित पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कहा, "प्रस्ताव जिसके नाम है उसे रखने को कहा जाए।... उन्हें आप बुलाइये।" उनके इस वक्तव्य को हरिवंश ने खारिज करते हुए सदन के नेता नड्डा को बोलने के लिए कहा। नड्डा ने कहा, "वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। आप सदन में बहस से भागते हैं।"
इस तीखे संवाद के बाद कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाने का प्रयास किया जिसकी उन्हें अनुमति नहीं दी गयी। इस पर कांग्रेस और उसके अन्य साथी दलों के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये। चर्चा के दौरान सत्त पक्ष के कई सदस्यों ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े सहकारिता क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विपक्ष के बहिर्गमन की आलोचना की।

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