कांग्रेस का केंद्र पर तीखा प्रहार: जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में गंभीर खामी, प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग दोहराई
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि जाति जनगणना का मतलब सिर्फ जातियों की गिनती नहीं बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है और गणना को लेकर सरकार ने जो तरीका अपनाया है, उसमें गंभीर खामियां हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में ड्रॉपडाउन सूची के बजाय खुले सवाल रखना बेहद गंभीर खामी है। इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपजातियां और वर्तनी दर्ज हो सकती हैं, जिससे जातिगत जनगणना की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को लिखे संयुक्त पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पत्र में मौजूदा प्रश्नावली रद्द कर जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नयी प्रश्नावली तैयार करने की मांग की गयी थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि पत्र में नयी प्रश्नावली तैयार करने के लिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक परामर्श करने की मांग भी की गयी थी। तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों की तरह पहले से तैयार एवं प्रमाणित जाति सूची के आधार पर गणना को इसका व्यावहारिक समाधान बताया गया था।
उन्होंने कहा कि खरगे और राहुल गांधी के पत्र का अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पिछले चार दिनों में देशभर में 17 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग दोहराई है।

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