फारस की खाड़ी में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान की बीच शांति समझौता टूटने की आशंका प्रबल, ईरान बोला- जल्दबाजी मंजूर नहीं
नए संशोधनों पर अड़े ट्रंप
दोहा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते की टूटने की आशंका जतायी जा रही है। कतर में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मेहरान कामरावा ने बताया कि फारस की खाड़ी में तनाव और सैन्य टकराव किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की परिसंपत्तियों पर लगी रोक और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को हटाने का प्रश्न अब भी बातचीत में प्रमुख गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हालांकि समझौते पर मोटेतौर पर रूपरेखा पर सहमति बन गई है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार नए संशोधन करने की प्रयास कर रहे हैं, जिसे ईरान भरोसे के लायक नहीं मानता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगे प्रतिबंधों को हटा ले, जबकि ट्रंप का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत "ईरान के बर्ताव' के आधार पर दी जानी चाहिये। राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर भी अड़े हैं कि समझौते के तहत ईरान की जब्त की गयी राशि जारी नहीं की जायेगी, भले ही मसौदा समझौते में इन संपत्तियों का आधा हिस्सा जारी करने का प्रावधान है। समझौते के स्वरूप को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं।
प्रो. कमरावा बताते हैं, "ईरानियों और अमेरिकियों की इस बात को लेकर बिल्कुल अलग-अलग धारणाएं हैं कि किसी समझौते का स्वरूप कैसा होना चाहिए। ईरान एक अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने वाले समझौते का पक्षधर है। वह इस प्रक्रिया में पर्याप्त समय लेना चाहता है और जरूरी नहीं कि किसी त्वरित समझौते पर पहुंचे। दूसरी ओर, अमेरिका एक शीघ्र और तेजी से संपन्न होने वाला समझौता चाहता है।"
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों का लगातार विरोध कर रहा इजरायल अब भी ऐसा अनिश्चित तत्व बना हुआ है, जो किसी भी समय शांति समझौते को विफल कर सकता है।

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