बिहार मंत्रीमंडल का विस्तार: अखबार और तेल बेचकर उठाते थे पढ़ाई का खर्च, आज बने सम्राट कैबिनेट के मंत्री, पहचाना कौन..?

कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रमोद कुमार ने शिक्षा और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा

बिहार मंत्रीमंडल का विस्तार: अखबार और तेल बेचकर उठाते थे पढ़ाई का खर्च, आज बने सम्राट कैबिनेट के मंत्री, पहचाना कौन..?

बिहार की सम्राट सरकार में प्रमोद चंद्रवंशी का मंत्री बनना संघर्ष की जीत है। कभी पटना की सड़कों पर अखबार और सरसों तेल बेचने वाले प्रमोद आज युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। अभावों के बीच पले-बढ़े इस साधारण किसान पुत्र की सादगी और समर्पण ने उन्हें शिखर तक पहुँचाया है।

जहानाबाद। बिहार की राजनीति में संघर्ष और सादगी की मिसाल माने जाने वाले डॉ. प्रमोद कुमार उर्फ प्रमोद चंद्रवंशी को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से जहानाबाद समेत पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। बेहद साधारण परिवार से निकलकर मंत्री पद तक पहुंचने वाले डॉ. प्रमोद कुमार की कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। जहानाबाद जिले के काको प्रखंड स्थित नेरथुआमठ गांव निवासी डॉ. प्रमोद कुमार का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। उनके पिता अयोध्या प्रसाद खेती-बाड़ी कर परिवार चलाते थे। सीमित आय होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रमोद कुमार ने शिक्षा और सामाजिक जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा।

छात्र जीवन में ही वे विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए और पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष शुरू किया। पटना के पोस्टल पार्क में रहकर उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए अखबार बेचने का काम किया। बाद में घर-घर जाकर सरसों तेल बेचकर भी अपनी पढ़ाई और जीवन-यापन का खर्च उठाया। स्थानीय लोगों के अनुसार संघर्ष के उन्हीं दिनों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया। बताया जाता है कि तेल व्यवसाय से उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है। हालांकि अब वे स्वयं घर-घर जाकर तेल नहीं बेचते, बल्कि पोस्टल पार्क स्थित उनकी स्थायी दुकान का संचालन कर्मचारी करते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार लगभग दो वर्ष पहले तक उनका पैतृक घर झोपड़ीनुमा था, जहां चोरी की घटना भी हो चुकी थी। बाद में उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर गांव में छोटा पक्का मकान बनवाया। परिवार की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि विधान परिषद सदस्य बनने के बाद भी उनका भाई पटना की एक निजी गैस एजेंसी में सामान्य वेतन पर नौकरी करता रहा। राजनीतिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने और संगठन के प्रति समर्पण के कारण डॉ. प्रमोद कुमार को पहले विधान परिषद पहुंचने का अवसर मिला और बाद में मंत्रिमंडल में जगह मिली। वर्ष 2025 में गठित नीतीश सरकार में भी उन्हें वन, पर्यावरण एवं सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट में भी उन्हें मंत्री बनाए जाने से समर्थकों और आम लोगों में उत्साह है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. प्रमोद कुमार का मंत्री बनना इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में आज भी साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले और संघर्ष के दम पर आगे बढ़ने वाले लोगों के लिए जगह बनी हुई है। धनबल और परिवारवाद के दौर में उनका राजनीतिक सफर आम लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश दे रहा है।

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