केन्द्र सरकार ने खोला 2 हजार पार यूपीआई पर शुल्क का रास्ता : कांग्रेस ने सरकार को घेरा, राहुल गांधी बोले- जनता की जेब पर पड़ेगा बोझ
महंगाई से खाली है आम आदमी की जेब पहले ही
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में यूपीआई भुगतान पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगाने के आश्वासन के बावजूद केन्द्र सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई कारोबारी लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। खड़गे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा नो फीस ऑन यूपीआई को बदलकर अब 'दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर नो फीस' कर दिया गया है।
गगनचुंबी महंगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है और थोक महंगाई 10 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता पर 'डिजिटल पेमेंट्स टैक्स' लगाकर उसकी बची-खुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कई खबरों के मुताबिक पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जाएगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि ये खबरें क्या सही हैं।
गांधी ने कहा कि अब दो हजार रुपये से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाया जा सकता है। इन लेनदेन की संख्या भले ही केवल 5 प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का करीब 65 प्रतिशत इन्हीं में है। उन्होंने कहा सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से-कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब केन्द्र सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।

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