हवाई यात्रा के अभूतपूर्व संकट की जिम्मेदारी ले सरकार : यह संकट सरकार के एकाधिकार की नीति का पहला नमूना, शशिकांत सेंथिल ने कहा- सरकार जारी करे श्वेत-पत्र 

सरकार की नीति का खामियाजा देश के नागरिकों को बड़े पैमाने पर भुगतना पड़ेगा

हवाई यात्रा के अभूतपूर्व संकट की जिम्मेदारी ले सरकार : यह संकट सरकार के एकाधिकार की नीति का पहला नमूना, शशिकांत सेंथिल ने कहा- सरकार जारी करे श्वेत-पत्र 

यह संकट अभूतपूर्व है और इसके कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में और अपने जरूरी काम करने से वंचित होना पड़ रहा है। 

नई दिल्ली। कांग्रेस ने देशभर में हवाई यात्रियों के समक्ष पैदा हुए अभूतपूर्व संकट को सरकार के एकाधिकार की नीति का पहला नमूना बताया और कहा कि स्थिति को संभालने में विफल रहे नागर विमानन मंत्री के राम मोहन नायडू को जिम्मेदारी लेते हुए सरकार को इस पर श्वेत-पत्र जारी करना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि विमानन कंपनी इंडिगो के कारण देश के नागरिकों के समक्ष विमानन क्षेत्र में जो अभूतपूर्व संकट खड़ा हुआ, वह सरकार की एकाधिकार नीति का एक नमूना मात्र है और आने वाले समय में एकाधिकार की सरकार की नीति का खामियाजा देश के नागरिकों को बड़े पैमाने पर भुगतना पड़ेगा। पार्टी ने कहा कि निजीकरण के काम में जुटी मोदी सरकार हर क्षेत्र में एकाधिकार को महत्व दे रही है और आने वाले समय में ऊर्जा, बंदरगाह आदि क्षेत्रों में भी इसी तरह का संकट देश को झेलना पड़ेगा इसलिए सरकार को एकाधिकार नहीं प्रतिस्पर्धा को महत्व देना चाहिए। कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश ने अब तक का सबसे बड़ा विमानन संकट देखा है। हजारों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और आज शनिवार को भी 600 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं हैं। इस संकट के कारण देश भर में अनगिनत यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं। यह संकट अभूतपूर्व है और इसके कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में और अपने जरूरी काम करने से वंचित होना पड़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति विमानन क्षेत्र में करीब डेढ़ साल से बनी हुई है लेकिन कुछ दिनों में यह संकट अपने चरम पर पहुंचा है। नागर विमानन महानिदेशालय-डीजीसीए के पायलटों के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। डीजीसीए ने पहली बार पिछले वर्ष इस संबंध में नियमों को अधिसूचित कर दिया था और इनके पालन के लिए एयरलाइंस के पास पर्याप्त समय था लेकिन हाल में ही की गई सख्ती के बाद संकट गहरा गया। सवाल है कि डीजीसीए नियमों को अधिसूचित कर इस पर अब तक चुप क्यों था जबकि नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी उसकी ही  थी। सवाल यह भी है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय अब तक क्या कर रहा था जबकि सब इन नियमों के अनुपालन की अनिवार्यता को जानते थे। सरकार को जवाब देना चाहिए कि पूरे देश को इस तरह की अराजकता में क्यों धकेला गया। 

सेंथिल ने इस संकट का कारण एकाधिकार की नीति को बताया और कहा कि लगभग 60-65 प्रतिशत बाजार को नियंत्रित करने का अधिकार एक ही कंपनी को कैसे मिल गया। इससे साफ है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद एकाधिकार को प्रोत्साहित और इसका समर्थन करने वाली सरकार इस संकट का इंतजार कर रही थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि एयरलाइंस में ही नहीं है बल्कि हवाई अड्डों को लेकर भी एकाधिकार को महत्व दिया गया है। एकाधिकार की वजह बताते हुए उन्होंने इंडिगो का ही उदाहरण दिया और कहा कि जब चुनावी बांड डेटा का खुलासा हुआ, तो इंटरग्लोब समूह ने लगभग 36 करोड़ रुपए के चुनावी बांड खरीदे थे। इंडिगो के प्रमोटर ने कथित तौर पर 20 करोड़ रुपए के चुनावी बांड खरीदे थे। उनका कहना था कि यह भी स्पष्ट हो चुका है कि इन चुनावी बांडों को किसने भुनाया था।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के संकट के समाधान के लिए मुझे सरकार की ओर से कोई पहल नजर नहीं आती। स्थिति से निपटने के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जब लोग संकट से गुजर रहे हैं तो सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है और यह चुप्पी उसकी विफलता का खुलासा करती है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सरकार ने पिछले 11 वर्षों में विमानन को एक प्रतिस्पर्धी, विविध क्षेत्र बनाने के बजाय एकाधिकार के दायरे में लाने का काम किया है। डीजीसीए संकट से निपटने में विफल क्यों रहा। यह नियम पिछले वर्ष जनवरी में अधिसूचित हो गया था और इस साल जुलाई से इसे आंशिक रूप से लागू कर अब एक नवंबर को पूरी तरह से लागू किया गया है। सवाल यह भी कि क्या सरकार ने कभी इंडिगो को इसे लेकर कोई चेतावनी दी भी थी या इस बारे में उसे सिर्फ संरक्षण ही देती रही। 

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