सरकार का शिक्षा तंत्र राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार से ग्रस्त, जयराम बोले- परीक्षा पर चर्चा नहीं, परीक्षा की समीक्षा की जरूरत

शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता की बराबरी केवल शिक्षा मंत्री के अहंकार से हो सकती है

सरकार का शिक्षा तंत्र राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार से ग्रस्त, जयराम बोले- परीक्षा पर चर्चा नहीं, परीक्षा की समीक्षा की जरूरत

कांग्रेस ने केंद्र सरकार के शिक्षा तंत्र पर अक्षमता, राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। जयराम रमेश ने कहा कि पेपर लीक, एनसीईआरटी विवाद, यूजीसी नियम और नियुक्तियों में गड़बड़ियां लगातार संकट पैदा कर रही हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर संसदीय समिति की सिफारिशें न मानने और अहंकार दिखाने का आरोप लगाते हुए परीक्षा प्रणाली की समीक्षा की मांग की।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार का शिक्षा तंत्र अक्षमता, राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है और समय परीक्षा पर चर्चा नहीं, बल्कि परीक्षा की समीक्षा का है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को यहां एक बयान में कहा कि केन्द्र सरकार का शिक्षा तंत्र तीसरे दर्जे की औसत अकादमिक सोच रखने वाले लोगों से भरा हुआ है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में खुद को बेहद अक्षम, राजनीतिक रूप से पक्षपाती और भ्रष्ट साबित किया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा को लेकर हर महीने कोई न कोई नया संकट सामने आता है, जिनमें एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कुलपतियों की नियुक्ति संबंधी मसौदा नियम, लगातार पेपर लीक, एनएएसी रिश्वतखोरी प्रकरण, आईसीएचआर घोटाला, समग्र शिक्षा निधि को कथित रूप से असंवैधानिक तरीके से रोकना, कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुपस्थित कुलपतियों की नियुक्ति और शिक्षकों के बड़े पैमाने पर रिक्त पद शामिल हैं।

रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता की बराबरी केवल शिक्षा मंत्री के अहंकार से हो सकती है। उनका कहना था कि जब मीडिया ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को लेकर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों पर अमल न करने के बारे में सवाल पूछा गया, तो शिक्षा मंत्री ने समिति की रिपोर्ट को यह कहकर गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया कि उसमें विपक्ष के सदस्य शामिल हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि समिति के 30 सदस्यों में 17 सांसद भारतीय जनता पार्टी के ही हैं और समिति की सिफारिशों में के. राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की पुनर्पुष्टि भी शामिल है, जिसका हवाला स्वयं मंत्री देते हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय स्थायी समिति को स्वीकार करने से इनकार करना अपनी ही पार्टी के सांसदों तथा संसद की बहुदलीय परंपराओं को खारिज करने जैसा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा पर चर्चा की नहीं, आज समय की मांग परीक्षा की समीक्षा है और शिक्षा मंत्री इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त नहीं दिखते।

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