रुपये में एतिहासिक गिरावट: ग्रीनलैंड विवाद के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 91.29 पर फिसला, वैश्विक ट्रेड वॉर का बढ़ा खतरा
पहली बार 91.29 के पार पहुंचा डॉलर
भारतीय रुपया बुधवार को अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया, क्योंकि ग्रीनलैंड विवाद से जुड़े जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने लगातार पूंजी बहिर्वाह और अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की अनुपस्थिति से पड़ने वाले दबाव को और बढ़ा दिया।
मुंबई। भारतीय रुपया बुधवार, 21 जनवरी 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक 'जोखिम से बचने' की प्रवृत्ति और ग्रीनलैंड विवाद के कारण रुपया अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 91.29 के रिकॉर्ड स्तर तक लुढ़क गया।
गिरावट के मुख्य कारक
मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर इस समय तिहरी मार पड़ रही है। बताया जा रहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में अब तक करीब $3 बिलियन की निकासी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ पर 10% से 25% टैरिफ लगाने की धमकी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता है। इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच किसी ठोस व्यापार समझौते की कमी ने भी निवेशकों के भरोसे को कम किया है।
RBI का रुख
हालांकि आरबीआई ने 91 के स्तर को बचाने के लिए डॉलर की बिक्री की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक केवल गिरावट की गति को धीमा कर रहा है, उसकी दिशा नहीं बदल रहा। यदि वैश्विक तनाव बना रहता है, तो रुपया जल्द ही 92 के स्तर को देख सकता है।

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