खड़गे का केंद्र पर हमला, बोले- सरकार ने झूठ बोलने के कुछ नहीं बदला, क्रोनी कैपिटलिज्म और कर्ज माफी का लगाया आरोप

बेरोजगारी और महंगाई से आम जनता बेहाल

खड़गे का केंद्र पर हमला, बोले- सरकार ने झूठ बोलने के कुछ नहीं बदला, क्रोनी कैपिटलिज्म और कर्ज माफी का लगाया आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जीडीपी वृद्धि के दावों के बीच आम जनता अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता से त्रस्त है। खरगे ने सरकार पर क्रोनी कैपिटलिज्म और अमीरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का जश्न मना रही है लेकिन हकीकत यह है कि आम आदमी बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती असमानता जैसी समस्याओं से त्रस्त है और उसके लिए इस सरकार में कुछ नहीं बदला है। खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखे एक पोस्ट में कहा कि बदलाव की बात करने वाली सरकार को समझना चाहिए कि जनता से झूठ बोलने के अलावा भाजपा शासन में कुछ नहीं बदला है। आम जनता अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता के बोझ तले दबी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आम लोगों पर तीन 'यू'—अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और बेलगाम असमानता का बोझ है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी 50 साल के उच्चतम स्तर पर है और 40 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हर छह में से एक युवा बेरोजगार था। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा अब टूट चुका है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि खुदरा महंगाई 19 महीने के उच्चतम स्तर पर है। चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल, चावल और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और सीएनजी भी आम लोगों के लिए महंगे होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवार किसी तरह गुजारा कर रहे हैं, जबकि गरीबों ने उम्मीद छोड़ दी है। खरगे ने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक असमानता ब्रिटिश शासन के दौर से भी बदतर स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि निचले 50 प्रतिशत लोग केवल 15 प्रतिशत संपत्ति पर निर्भर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में गरीबों से अमीरों की ओर संपत्ति के सबसे बड़े हस्तांतरण को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने सरकार पर 'क्रोनी कैपिटलिज्म' को अपनी एकमात्र आर्थिक नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से कंपनियों के 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज बट्टे खाते में डाले जा चुके हैं। उन्होंने एक हालिया मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले कर्जदाताओं को केवल 6.5 करोड़ रुपये की वसूली हुई, यानी 99.97 प्रतिशत की 'हेयरकट' हुई।

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