शहीद दिवस पर कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम : इसके खिलाफ लगा देंगे पूरी ताकत, जयराम रमेश ने कहा- लोगों के पास रोजगार की कानूनी गारंटी थी मनरेगा कानून

बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा कार्यकर्ता शामिल हुए

शहीद दिवस पर कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम : इसके खिलाफ लगा देंगे पूरी ताकत, जयराम रमेश ने कहा- लोगों के पास रोजगार की कानूनी गारंटी थी मनरेगा कानून

कांग्रेस ने महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत पार्टी मुख्यालय से 30 जनवरी मार्ग तक मार्च निकाला। वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं ने मनरेगा कानून के समर्थन में नारे लगाए। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कांग्रेस ने अधिनियम को रद्द किए जाने का विरोध करते हुए ग्रामीण रोजगार और गरीबों के हक की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर पार्टी मुख्यालय से गांधी के शहीद स्थल 30 जनवरी मार्ग तक मार्च करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) बचाओ संग्राम के तहत मार्च निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत में बसा है और केंद्र सरकार लाख कोशिशों के बाद भी उसे मिटा नहीं सकती। पार्टी का कहना है कि उसके कार्यकर्ता इसके खिलाफ अपनी पूरी ताकत लगा देंगे और सरकार की इस साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने मनरेगा का समर्थन करते हुए प्रदर्शन करते हुए नारे लगाए। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता अजय माकन, जयराम रमेश, राजीव गौड़ा, पवन खेड़ा, देवेंद्र यादव, कर्नल रोहित चौधरी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। बाद में पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। गौरतलब है कि कांग्रेस हाल ही में बनाये गये नये अधिनियम को समाप्त कर मनरेगा की बहाली की मांग कर रही है और इसके लिए देशव्यापी विरोध के तहत उसने  मनरेगा बचाओ संग्राम शुरु किया है। कांग्रेस का देशव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम 10 जनवरी से शुरु हुआ और 28 फरवरी तक चलेगा।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि यह दिल्ली में मनरेगा बचाओ संग्राम की झलक है। केंद्र सरकार ने बुलडोजर चलाकर मनरेगा अधिनियम को रद्द कर दिया। मनरेगा ऐतिहासिक और क्रांतिकारी अधिनियम था, जो सितंबर 2005 को सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इस अधिनियम को बनाने में सोनिया गांधी और राहुल गांधी का महत्वपूर्ण योगदान था। मनरेगा कानून संवैधानिक हक था, लोगों के पास रोजगार की कानूनी गारंटी थी। इस कानून से पंचायतें मजबूत हुईं। हर परिवार को पहली बार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से पैसा पहुंचाया गया। लेकिन ये कानून रद्द कर दिया गया, क्योंकि नरेंद्र मोदी नहीं चाहते हैं कि महात्मा गांधी से जुड़ा हुआ ये कानून ज्यादा समय तक चले। वो नहीं चाहते हैं कि लोगों को उनका हक मिले।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि मनरेगा की लड़ाई देश के आम गरीब नागरिकों के रोजगार और हक की लड़ाई है, जिसे कांग्रेस पूरे देश में लड़ रही है। कांग्रेस की सरकार में गरीबों को हक मिला था- इज्जत और सम्मान के साथ कमाने का, अपने गांव में रहकर काम करने का, जिससे उनके गांव का विकास हो। नरेंद्र मोदी ने उसे खत्म कर दिया है। 

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