"मन की बात" में पीएम मोदी का बड़ा बयान: निजी भागीदारी से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत ने रचा नया इतिहास, विक्रम-1 बना मिसाल

युवा वैज्ञानिकों ने बढ़ाया भारत का वैश्विक गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में भारत के बढ़ते अंतरिक्ष और वैज्ञानिक सामर्थ्य की प्रशंसा की। उन्होंने निजी क्षेत्र निर्मित रॉकेट 'विक्रम-1' के सफल प्रक्षेपण और अंतरराष्ट्रीय साइंस ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के शानदार प्रदर्शन को देश का मान बढ़ाने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला है जिसके अच्छे परिणाम 'विक्रम-1' के प्रक्षेपण के रूप में दुनिया के सामने हैं। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम "मन की बात" में कहा कि पिछले रविवार (19 जुलाई 2026) को निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण से हर भारतीय गौरवान्वित है। देश के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए उन्होंने कहा, "हमारे युवा नवोन्मेषकों ने वह कर दिखाया, जिसकी कभी कल्पना करना भी कठिन था। लंबे समय तक हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा, जिससे अनेक प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिल पाया। हमने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोला और आज पूरी दुनिया उसके सकारात्मक परिणाम देख रही है।"

प्रधानमंत्री ने साइंस ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के अच्छे प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस महीने आयोजित भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के ओलंपियाड में भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन किया है। भौतिकी ओलंपियाड में सभी पांच भारतीय विद्यार्थियों ने स्वर्ण पदक जीते और भारत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पिछले एक दशक से हर भौतिकी ओलंपियाड में भारतीय प्रतिभागी स्वर्ण या रजत पदक जीतते आ रहे हैं।

रसायन विज्ञान ओलंपियाड में भी सभी भारतीयों ने स्वर्ण पदक हासिल किये। जीव विज्ञान ओलंपियाड में भी हर भारतीय विद्यार्थी ने पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण पदक भी शामिल है। गणित ओलंपियाड में भारतीय प्रतिभागियों ने दो स्वर्ण और चार रजत पदक प्राप्त किये। उन्होंने देश के युवाओं के प्रदर्शन पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में ओलंपियाड और हैकाथॉन की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

मोदी ने मणिपुर के खगोल भौतिकी वैज्ञानिक रोनाल्डो लैशराम के बारे में भी बताया जो जापान में काम करते हैं और युवा आकाशगंगाओं के एक विशाल समूह की खोज करने वाली एक टीम का हिस्सा रहे हैं। वह देश से इतनी दूर रहते हुए भी अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। उन्होंने इस पूरे समूह का नाम मणिपुर की खूबसूरत लोकटक झील से जोड़कर लोकटक प्रोटो क्लस्टर रखा है।

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लोकटक ताजे पानी की बहुत बड़ी झील है जिसमें तैरती हुई 'फूमडी' (वनस्पतियों, मिट्टी और अन्य कार्बनिक पदार्थों के छोटे-छोटे पिंड) मिलकर एक अनोखा दृश्य बनाती है। ऐसा लगता है कि विशाल समंदर में छोटे-छोटे द्वीप तैर रहे हों। उसी प्रकार ब्रह्मांड में ये युवा आकाशगंगाएं भी एक विशाल संरचना का निर्माण करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. लैशराम के कारण आज मणिपुर की लोकटक झील विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है। यह उपलब्धि हर भारतीय का गौरव बढ़ाने वाली है।

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