डॉलर के मुकाबले रुपया में अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर गिरावट, डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74, रुपया 80 का आकंड़ा छूने की आशंका

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशको की मुनाफावसूली करने के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी गयी

डॉलर के मुकाबले रुपया में अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर गिरावट,  डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74, रुपया 80 का आकंड़ा छूने की आशंका

नई दिल्ली। लगातार रुपये में गिरावट देखी जा रही है और एक बार फिर रुपये अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक की तमाम कोशिश के बावजूद भी लगातार रुपये में होने वाली गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरूवार को फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74 रुपये तक चला गया जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

नई दिल्ली। लगातार रुपये में गिरावट देखी जा रही है और एक बार फिर रुपये अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक की तमाम कोशिश के बावजूद भी लगातार रुपये में होने वाली गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरूवार को फॉरेक्स मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया 79. 74 रुपये तक चला गया जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले ही यह 79.66 के निचले स्तर पर था लेकिन अब लग रहा है कि जल्द ही यह 80 के निचले आंकड़े को भी छू सकता है।

रूपये के गिरने की वजह यह रही
आज के ट्रेड के दौरान रुपया सुबह 79. 92 रुपये पर खुला था। लेकिन अगर पूरे दिन के ट्रेड की बात करें तो एक समय ऐसा भी आया की यह 79.92 के स्तर तक भी पहुंच गया था। करेंसी बाजार के बंद होते होते यह 79. 88 के पायदान पर पहुंचकर बंद हुआ। देखा जा रहा है कि इस हफ्ते भारतीय बाजार में विदेशी निवेशको की मुनाफावसूली करने के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी गयी है। हम कह सकते हैं कि विदेशी बाजार में अस्थिरता के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। आपको बतादें 23 फरवरी 2022 को रूस-यूक्रेन के युद्ध से पहले रुपया, डॉलर के मुकाबले 74.62 रुपये पर था।

महंगे डॉलर से यह होगी परेशानियां
महंगे डॉलर से भारत को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सरकार विदेश से तेल खरीदती है जिसका भुगतान डॉलर में किया जाता है और अगर रुपया के मुकाबले डॉलर की कीमत ज्यादा होगी तो भारत को डॉलर के मुकाबले ज्यादा रुपये भुगतान करने पड़ेंगे। जिसके कारण आयात भी महंगा होगा और लोगों को पेट्रोल डीजल पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। सरकारी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल के दाम में उछाल के बावजूद 6 अप्रैल के बाद से पेट्रोल – डीजल के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं किया है, जिसके चलते भारत सरकार को पहले से ही नुक्सान झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा डॉलर की बढ़ोत्तरी से विदेश में पढाई भी और अधिक महंगी हो जाएगी। इसके अलावा खाने का तेल पहले से ही महंगा है पर अगर रुपये की ये हालत रही तो खाने का तेल भी महंगा हो जायेगा। इसके अलावा जो भी वस्तुएं भारत सरकार विदेश से खरीदती है उन सब में भी उछाल देखने को मिल सकता है।

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