लद्दाख की बंजर जमीन पर खिला केसर, 30 दिन में ही तैयार हुई फसल; कश्मीर को मिलेगी नई चुनौती
ईरान की उन्नत किस्म के 90 हजार कॉर्म लगाए
लेह। बर्फीली पहाड़ियों और ठंडे रेगिस्तान के लिए पहचाने जाने वाले लद्दाख की बंजर जमीन अब केसर की खुशबू से महकने लगी है। यहां के ऊंचाई वाले इलाकों में केसर की खेती का प्रयोग उम्मीद से बेहतर साबित हो रहा है। लेह में खराब हो चुकी जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाकर शुरू की गई पायलट परियोजना में महज 30 दिनों के भीतर केसर के फूल खिलने लगे हैं। खास बात यह है कि जहां सामान्य तौर पर फूल आने में करीब दो महीने लगते हैं, वहीं लद्दाख में यह प्रक्रिया आधे समय में पूरी हो गई। परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार, खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं। सोमवार सुबह तो एक ही दिन में 72 फूल खिले। शुरुआती चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर भी एकत्र किया जा चुका है।
4 हजार वर्ग मीटर में हुआ प्रयोग
यह प्रयोग 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत करीब 4 हजार वर्ग मीटर जमीन पर किया गया है। इसमें ईरान की उन्नत किस्म के लगभग 800 किलोग्राम केसर कॉर्म (कंद) लगाए गए हैं, जिनकी संख्या करीब 90 हजार है। एक अक्टूबर को रोपण के बाद इतनी जल्दी फूल खिलना वैज्ञानिकों के लिए भी उत्साहजनक है।
केसर उत्पादन के नए क्षेत्र के रूप में उभरने की उम्मीद
भारत में केसर का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है। ऐसे में लद्दाख का यह प्रयोग देश में केसर उत्पादन के नए क्षेत्र के रूप में उभरने की उम्मीद जगा रहा है। यह पहल खेती में विविधता लाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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