दिल्ली SIR पर निर्वाचन आयोग से पूछे कड़े सवाल, वोटर लिस्ट में छूटे लोगों से फार्म-6 क्यों भरवाया जा रहा: SC
मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से बुधवार को कड़े सवाल पूछे। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह जानना चाहा कि जो लोग पहले से ही मतदाता के रूप में पंजीकृत थे लेकिन नई ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर छूट गए हैं, उन्हें फॉर्म 6 भरने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। यह उन्हें पहली बार के मतदाता के रूप में पेश करता है। कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई नवंबर में करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जी. राजगोपालन ने दलील दी कि प्रशासनिक नजरिए से जो लोग नई ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, उन्हें इस एसआईआर प्रक्रिया के तहत एक नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसलिए उन्हें पहली बार के मतदाता की श्रेणी में रखा गया। कोर्ट ने इस तर्क की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ये नागरिक पहले से ही 2026 की मतदाता सूची में सत्यापित मतदाता थे।
दस्तावेज गलत घोषणा करने के लिए बाध्य करता है: भूषण
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने एक गंभीर कानूनी संकट की ओर ध्यान दिलाया। फॉर्म 6 में आवेदक को शपथ लेकर यह घोषणा करनी होती है कि उसने पहले कभी मतदाता के रूप में पंजीकरण नहीं कराया है। पहले से पंजीकृत मतदाताओं को इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करना असल में उन्हें एक गलत घोषणा करने के लिए बाध्य करता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत ऐसा करना एक आपराधिक अपराध है, जिसके लिए जेल की सजा भी हो सकती है।
मतदान का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदान का अधिकार एक बेहद महत्वपूर्ण अधिकार है और इस मामले में पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया पुराने मतदाताओं को नया फॉर्म 6 भरने के बजाय सामान्य एनुमरेशन फॉर्म या फॉर्म 8 का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। निर्वाचन आयोग को उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए जिनके नाम हटाए गए हैं, ताकि प्रभावित लोग आसानी से अपना नाम देख सकें और सुधार के लिए अपने बीएलओ से संपर्क कर सकें।

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