गरीबों के आवासों पर सरकार सख्त, मकान-भूखंड लॉटरी और निर्माण में देरी की तो डेवलपर पर लगेगा जुर्माना
मुख्यमंत्री जन आवास योजना-2026 का प्रारूप जारी
जयपुर। शहरों में महंगी जमीन और मकानों की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ती छत उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना-2026 का प्रारूप तैयार किया है। इस प्रारूप पर 20 नवंबर 2026 तक आपत्ति व सुझाव मांगे है। प्रावधानों में आवासों का निर्माण डेवलपर को भवन मानचित्र स्वीकृति के छह महीने के भीतर निर्माण शुरू करना होगा। देरी पर पहले साल प्रति अधूरे आवास 5 हजार और अगले साल 10 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। सरकारी जमीन पर बनने वाली आवासीय योजनाओं में कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए आरक्षित करना होगा।
6 से 9 लाख की सालाना आय पर एमआईजी-ए श्रेणी : योजना में तीन लाख रुपए तक सालाना आय वाले परिवारों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और तीन से छह लाख रुपए तक आय वालों को अल्प आय वर्ग (एलआईजी) में रखा है। छह से नौ लाख रुपए तक सालाना आय वाले परिवारों के लिए एमआईजी-ए श्रेणी निर्धारित की है।
निजी स्कीमों में 25 प्रतिशत पर ईडब्ल्यूएस रिजर्व : निजी जमीन पर भी गरीबों के आवास का रास्ता खोला गया है। निजी डेवलपर की बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं में कुल निर्मित क्षेत्र का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें ईडब्ल्यूएस के लिए कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा रखना होगा।
ये होगा एरिया :
योजना में ईडब्ल्यूएस परिवारों के लिए 30 से 45 वर्गमीटर और एलआईजी के लिए 45 से 60 वर्गमीटर कारपेट एरिया के फ्लैट निर्धारित किए हैं। भूखंडीय योजनाओं में ईडब्ल्यूएस के लिए 30 से 45 और एलआईजी के लिए 45 से 75 वर्गमीटर के भूखंड होंगे।
आवंटन में पारदर्शिता और देरी पर कार्रवाई :
गरीब परिवारों को मकान आवंटित करने के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी करना और पात्र आवेदकों के बीच पारदर्शी लॉटरी निकालना अनिवार्य होगा। इसके अलावा 10 प्रतिशत आवेदकों की प्रतीक्षा सूची तैयार की जाएगी।

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