सांप का जहर बचाएगा जान : भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश, गुजरात में बन रहा सबसे प्रभावी एंटीवेनम

98 फीसदी है सक्सेस रेट 

सांप का जहर बचाएगा जान : भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश, गुजरात में बन रहा सबसे प्रभावी एंटीवेनम

गुजरात सरकार ने वलसाड के धरमपुर स्थित सर्प अनुसंधान केंद्र में स्थानीय जहरीले सांपों के जहर से एंटीवेनम बनाने की पहल की है। इंडियन कोबरा सहित चार प्रजातियों के जहर की ई-नीलामी की गई। राज्य सरकार एंटीवेनम खरीदकर अस्पतालों को उपलब्ध कराएगी।

अहमदाबाद। सांपों से होने वाली मौतें को घटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात ने बड़ी पहल की है। कुछ ही दिनों में गुजरात के बाद सांप के कटाने के बाद खुद का लोकल और पॉवरफुल एंटीवेनम उपलब्ध होगा। ऐसा करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य है, जबकि भारत सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार गुजरात सरकार के पास जल्द ही राज्य में पाए जाने वाले जहरीले सांपों से ही बना एंटीवेनम उपलब्ध होगा। गुजरात सरकार ने इसके लिए दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर शहर में सर्प अनुसंधान केंद्र (स्नेक रिसर्च इंस्टीट्यूट-एसआरआई) की स्थापना की है। इस संस्थान में लगभग 460 जहरीले सांपों को रखा गया है। राज्य सरकार के अनुसार सांपों की देखभाल और जहर निकालने की प्रक्रिया में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन का पालन किया जाता है। सांप से निकाले गए जहर को आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए प्रोसेस कर पाउडर में बदला जाता है। इस पाउडर की नीलामी कर उसे लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निमार्ताओं को दिया जाएगा। गुजरात सरकार निमार्ताओं द्वारा पाउडर से बनाए गए एंटीवेनम को खरीदेगी और राज्य के विभिन्न हॉस्पिटलों को सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीवेनम की आपूर्ति करेगी। सीएम भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन के अनुसार राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया ने हाल ही में इस केंद्र का दौरा भी किया।

कोबरा समेत सभी जहरीले सांप शामिल :

सर्प अनुसंधान केंद्र ने हाल ही में गुजरात में पाए जाने वाले चार प्रमुख जहरीले सांपों की प्रजातियों- इंडियन कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर- के लायोफिलाइज्ड (पाउडर स्वरूप में) जहर की ई-नीलामी की। इस नीलामी में लाइसेंस वाले एंटीवेनम बनाने वाले निमार्ताओं ने हिस्सा लिया। जहरीले सांपों से निकाले गए जहर की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण इसकी बिक्री ऊंचे दामों पर हुई। इंडियन कोबरा के जहर के लिए प्रति ग्राम 40,000 रुपए का आधार मूल्य निर्धारित किया गया था, लेकिन हमें प्रति ग्राम 44,000 रुपए प्राप्त हुए। सॉ-स्केल्ड वाइपर के जहर के लिए प्रति ग्राम 50,000 रुपए के आधार मूल्य के मुकाबले हमें 56,500 रुपए मिले। दूसरी प्रजातियों के लिए भी बेहतर प्रतिक्रिया के साथ ऊंचे दाम मिले।

बदल जाता है जहर का पैटर्न :

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केंद्र के उपाध्यक्ष डॉ. डी.सी. पटेल ने कहा कि सर्पदंश के उपचार में मुख्य चुनौती अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से सांप के जहर का बदल जाना है। कई बार दूर-सूदुर क्षेत्र से लाए गए जहर से बनाया गया एंटीवेनम कम प्रभावी सिद्ध होता है। इसीलिए गुजरात सरकार ने सर्प अनुसंधान केंद्र की स्थापना की है। यहां गुजरात में पाए जाने वाले जहरीले सांप की प्रजातियों से जहर एकत्रित कर एंटीवेनम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। हमें उम्मीद है कि गुजरात में पकड़े गए सांप के जहर से बने एंटीवेनम सर्पदंश के उपचार में और अधिक कारगर साबित होंगे।

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98 फीसदी है सक्सेस रेट :

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इस संदर्भ में डॉक्टर्स का कहना है कि सर्पदंश के उपचार में उनकी सफलता की दर 98 फीसदी से अधिक है। उन्होंने पिछले 35 सालों के दौरान सांप के डसने के हर केस का दस्तावेजीकरण भी किया है। देश में एंटीवेनम बनाने के लिए सांप से जहर निकालने का काम अभी तमिलनाडु स्थित इरुला स्नेक कैचर्स इंडस्ट्रियल को-ऑपरेटिव सोसायटी लि. करती है। धरमपुर स्थित केंद्र अब इस कार्य को करने वाला देश का दूसरा संस्थान बन गया है।

पीएम मोदी ने 2024 में देखा था सपना :

भारत सर्पदंश एन्वेनोमिंग के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च की थी। इसका मुख्य उद्देश्य 2030 तक सांप के डसने से होने वाली मौतों और दिव्यांगता को 50 फीसदी तक कम करना है। गुजरात का सर्प अनुसंधान केंद्र इसी लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। केंद्र ने अभी तक लगभग 300 से अधिक स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर्स (सांप बचावकर्मी) और 23 जिलों में 1495 से अधिक डॉक्टरों एवं मेडिकल ऑफिसरों को सर्पदंश प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

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