परिश्रम और अनुशासन से उम्र को नम्बर साबित किया, ‘मोदी’ विकास का जीता-जागता नाम
देश के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की मिसाल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने जीवन के 76वर्ष पूरे कर 77वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। ‘नरेंद्र दामोदर दास मोदी’ एक ऐसे इंसान जिन्होंने उम्र को महज एक नम्बर साबित किया है। अपने कठिन परिश्रम, निर्णय लेने की क्षमता और कठोर अनुशासन से इन्होंने भारतीय राजनीति में एक अलग ही पहचान बनाई है। चाहे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लिए गए फैसले हों या देश के प्रधानमंत्री पद पर रहकर किए गए काम, मोदी ने साबित किया है कि अगर कुछ ठान लिया जाए तो वह संभव है। इसी का परिणाम है कि आज देश अर्थव्यवस्था से लेकर सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और विदेशों में देश की साख के मामलों में अग्रणी है।
एक साधारण घर से प्रधानमंत्री पद तक
नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। उनका बचपन एक सामान्य परिवार में बीता। सार्वजनिक जीवन में उनकी शुरुआती पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बनी। आगे चलकर वे भाजपा के संगठन में सक्रिय हुए और धीरे।धीरे राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
सीएम पद पर रहते हुए गुजरात मॉडल की हर तरफ चर्चा
2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने। लगभग 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने शासन किया। इस अवधि में गुजरात में सड़क, बिजली, औद्योगिक निवेश, सिंचाई और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई पहल हुई। उनके समर्थक गुजरात मॉडल को विकास, निवेश और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित शासन का उदाहरण मानते हैं।
लगातार तीन बार पीएम पद पर
2014 में नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उस समय देश में महंगाई, भ्रष्टाचार, आर्थिक सुस्ती और रोजगार को लेकर असंतोष प्रमुख राजनीतिक मुद्दे थे। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बहुमत मिला और 26 मई, 2014 को मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 30 मई, 2019 को वे दूसरी बार प्रधानमंत्री बने और 9 जून, 2024 को तीसरी बार शपथ ली।
स्वतंत्र भारत में जन्मे पहले प्रधानमंत्री
एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मोदी स्वतंत्र भारत में जन्मे पहले पीएम हैं। यह तथ्य उनकी पीढ़ीगत पहचान को दर्शाता है। वे उस भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने स्वतंत्रता के बाद की उदारीकरण, तकनीकी बदलाव, टेलीविजन और डिजिटल युग के बीच अपना राजनीतिक अनुभव प्राप्त किया।

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