दशलक्षण पर्व : दूसरे दिन भी मनाया गया उत्तम क्षमा धर्म, आचार्य विशद सागर- क्षमा से बड़ा कोई मित्र नहीं, क्रोध से बड़ा कोई शत्रु नहीं
चातुर्मास स्थलों पर संतों ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन दिए
जयपुर। दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के 11 दिवसीय दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को भी वीतराग धर्म का पहला लक्षण उत्तम क्षमा भक्ति भाव से मनाया गया। तिथि वृद्धि के कारण इस बार उत्तम क्षमा धर्म दो दिन मनाया गया। शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में सुबह श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा के बाद दशलक्षण धर्म की विधान मंडल पर अष्ट द्रव्य से पूजा-अर्चना की गई। चातुर्मास स्थलों पर संतों ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन दिए। सांगानेर थाना सर्किल स्थित चित्रकूट कॉलोनी के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में दशलक्षण महापर्व में आचार्य विशद सागर महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि क्षमा से बड़ा कोई मित्र नहीं होता, वहीं क्रोध से बड़ा कोई शत्रु नहीं होता। उन्होंने कहा कि मनुष्य को क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए क्षमा को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे पूर्व धर्मसभा का दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य विशद सागर महाराज के पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट की गई।
अध्यक्ष अनिल जैन काशीपुरा और महामंत्री मूलचन्द पाटनी ने बताया कि शाम को आरती के बाद प्रतिक्रमण पाठ सहित रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए। प्रचार-प्रसार समन्वयक विनोद जैन कोटखावदा एवं एडवोकेट महावीर सुरेन्द्र जैन के मुताबिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। दशलक्षण महापर्व 25 सितम्बर तक चलेगा। 20 सितम्बर तक पुष्पांजलि व्रत, 25 सितम्बर तक 11 दिवसीय दशलक्षण व्रत किए जाएंगे। 18 सितम्बर को निर्दोष सप्तमी मनाई जाएगी। 21 सितम्बर को सुगन्ध दशमी मनाई जाएगी। इस दिन मंदिरों में ज्ञानवर्धक तथा संदेशात्मक झांकियां सजाई जाएंगी। 23 से 25 सितम्बर तक कर्म निर्झर तेला मनाया जाएगा। 25 सितम्बर को अनन्त चतुर्दशी एवं दशलक्षण समापन कलश होंगे। रविवार 27 सितम्बर को षोडशकारण समापन कलश एवं पड़वा ढोक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।

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