परकोटे में निकली 208 साल पुरानी हेड़े की परिक्रमा, शाम को राजसी शोभायात्रा में हुई परिवर्तित
दो पालकी पर विराजे चार स्वरूप सरकार
जयपुर। परकोटे में बुधवार को भक्ति परंपरा की जुगलबंदी देखने को मिली। अवसर था-208 साल पुरानी श्री गोपालजी महाराज की हेड़े की परिक्रमा का। सुबह सादगी और भक्ति के साथ गोपाल जी का रास्ता स्थित श्री नृसिंह जी के मंदिर से शुरू हुई परिक्रमा शाम को राजसी शोभायात्रा में बदल गई। सांगानेरी गेट, धूलेश्वर महादेव मंदिर, हाथी बाबू का बाग, नाहरी का नाका स्थित पंचमुखी हनुमानजी, धूलकोट, गढ़ गणेश, नहर के गणेशजी, धोती वालों की बगीची, बद्री नारायणजी की डूंगरी और लाल डूंगरी स्थित कल्याणजी, गणेशजीए घाट के बालाजी होते हुए गलताजी पहुंची। गलताजी में स्नान और विश्राम किया।
दो पालकी पर विराजे चार स्वरूप सरकार :
घाट की गूणी के नीचे स्थित फ तेह चंद्रमाजी के मंदिर में चार बालकों को गोपाल जी, राधाजी, ललिता और विशाखा का स्वरूप बनाकर बहुमूल्य जेवर और विशेष पोशाक पहनाकर सजाया गया। श्रृंगार के बाद चारों स्वरूपों को चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। शाम को पालकी के साथ परिक्रमा फि र आगे बढ़ी। सांगानेरी गेट से हेड़े की परिक्रमा ने शोभायात्रा का रूप ले लिया। आगे हाथी-घोड़े-ऊंटों का लवाजमा, शहनाई की स्वर लहरियां और बैंड-बाजों की भक्तिमय धुनें चल रही थीं। पीछे चांदी की दो पालकी में चार स्वरूप विराजमान थे।

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