बारिश की फुहारों के बीच आकाश छूता रहा श्रीकृष्ण जन्म के उत्साह का ज्वार, गोविन्द देव जी सहित शहर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

कान्हा जन्म की छाई खुशियां

बारिश की फुहारों के बीच आकाश छूता रहा श्रीकृष्ण जन्म के उत्साह का ज्वार, गोविन्द देव जी सहित शहर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
राजस्थान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह से मनाई। मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और रात 12 बजे ‘नन्द के आनन्द भयो’ के जयकारों से वातावरण गूंजा। जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में एक किलोमीटर से अधिक लंबी कतारें।

जयपुर। राज्य में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आस्था, उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई। मंदिरों में सुबह सवेरे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया, मंगला झांकी से ही मंदिरों में तिल रखने के लिए जगह नहीं मिली। भगवान विष्णु के आठवें अवतार के उमंग का ज्वार वस्तुत: आसमान छूता रहा। प्रदेश के बड़े मंदिरों में शुक्रवार तड़के से ही श्रद्धालु उमड़ने लगे, जो दिन निकलने के साथ जनसमुद्र  में बदल गया। मंदिरों में कान्हा के स्वागत के लिए रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक तरीके से मंदिर परिसरों को फूलों से सजाया गया। राज्य के अनेक हिस्सों में बारिश की फुहारों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीकृष्ण के दर्शन किए। रात बारह बजे कान्हा के जन्म के साथ ‘बधाई हो...’ ‘नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैयालाल की’के घोष से गूंज उठा।

जयपुर में कृष्ण मंदिरों के साथ शिव मंदिरों, हनुमान मंदिरों और अन्य देवालयों में भी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया।  सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, शृंगार, भजन-कीर्तन और झांकियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। गुलाबी नगरी के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में सुबह करीब ढाई बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। सुबह चार बजे मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू हुए। गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी के दर्शनों के लिए करीब एक किमी से अधिक लंबी लाइनें लगी। गोविंददेवजी मंदिर में रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इससे पहले ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक हुआ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महापर्व मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में मनाया गया। अभिषेक के लिए मंदिर में 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद का उपयोग किया गया। रात 10 से 11 बजे तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा का पाठ हुआ। मध्यरात्रि 12 बजे 31 तोपों की हवाई गर्जना और विशेष आतिशबाजी के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया गया।

वीआईपी दर्शन के कारण लोगों को परेशानी :

गोविन्द देव जी मंदिर में भारी भीड़ के चलते दर्शनार्थियों की लम्बी लाइनें लगने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रुक-रुक कर बारिश का दौर चलने और सुबह के समय थोड़ी उमस के चलते लोग परेशान होते रहे। वीआईपी लोगों को दर्शन कराने के चक्कर में श्रद्धालु परेशान होते रहे।

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