आरसीसीआई-पेंशन नियामक प्राधिकरण की कार्यशाला में कंपाउंडिंग, टैक्स लाभ, निवेश और सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने किया जागरूक
एमएसएमई उद्यमियों-कर्मचारियों को दी एनपीएस की जानकारी
जयपुर। राजस्थान के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और कर्मचारियों को दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा एवं बेहतर सेवानिवृत्ति योजना के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आरसीसीआई) एवं पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को चैंबर भवन में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) पर विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में उद्योग एवं व्यापार जगत के प्रतिनिधियों, एमएसएमई उद्यमियों, नियोक्ताओं और कर्मचारियों ने भाग लिया। पीएफआरडीए के विशेषज्ञ संदीप घुनावत ने एनपीएस की कार्यप्रणाली, प्रमुख विशेषताओं, लाभों और दीर्घकालीन वित्तीय नियोजन में इसकी उपयोगिता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनपीएस कम लागत वाली व्यवस्थित एवं दीर्घकालीन सेवानिवृत्ति बचत व्यवस्था है, जिसमें नियमित योगदान के माध्यम से भविष्य के लिए रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार किया जा सकता है।
आरसीसीआई अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने कहा कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में एमएसएमई क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए कारोबार की निरंतर वृद्धि के साथ दीर्घकालीन वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश में सेवानिवृत्ति की योजना समय रहते बनाना आवश्यक है। एनपीएस जैसी योजनाओं के प्रति जागरूकता व्यक्तिगत वित्तीय सुरक्षा के साथ जिम्मेदार एवं सुदृढ़ कार्यबल तैयार करने में भी सहायक है।
कार्यशाला में पावर ऑफ कंपाउंडिंग, कम लागत वाली निवेश संरचना, दीर्घकालीन निवेश, पोर्टेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी, उपलब्ध कर लाभ, नियोक्ता एवं कर्मचारी के लिए एनपीएस की उपयोगिता, ऑनलाइन-ऑफलाइन पंजीकरण, योगदान, खाते के संचालन तथा सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।
उद्योग विभाग के सहायक निदेशक भवानी सिंह ने कहा कि कार्यकाल के शुरुआती चरण से नियमित रूप से सेवानिवृत्ति के लिए निवेश शुरू करने पर दीर्घकालीन निवेश और कंपाउंडिंग का लाभ मिल सकता है। उन्होंने युवाओं और कार्यरत वर्ग में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
यूटीआई पेंशन फंड के प्रतिनिधि तथा एचडीएफसी बैंक पेंशन फंड के प्रतिनिधि जसविंदर सिंह ने भी संबोधित किया। इस दौरान एमएसएमई इकाइयों में कर्मचारियों के लिए पेंशन एवं रिटायरमेंट प्लानिंग को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने टैक्स लाभ, योगदान, निवेश विकल्प, निकासी, पोर्टेबिलिटी और रिटायरमेंट लाभ से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील भार्गव ने भी वित्तीय नियोजन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। समापन पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल ने पीएफआरडीए के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों का आभार जताया। कार्यक्रम में कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आर. एस. जैमिनी, उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश, मानद महासचिव आनंद महरवाल, बृज बिहारी शर्मा, संयुक्त सचिव बादशाह मियां, अतिरिक्त मानद सचिव प्रभात गुप्ता, यंग वुमेन एंटरप्रेन्योर विंग की चेयरपर्सन सोनिका महरवाल, चांदनी जग्गा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर योगेश नारायण माथुर, सचिव दिनेश कानूनगो, अतिरिक्त सचिव कन्हैया लाल जांगिड़, संयुक्त सचिव अमित पारीक सहित बड़ी संख्या में एमएसएमई उद्यमी, उद्योग संघों, बैंकों, ट्रेड यूनियन एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आरसीसीआई अध्यक्ष डॉ. जैन ने कहा कि चैंबर की ओर से भविष्य में भी उद्योग, व्यापार और एमएसएमई क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप वित्तीय जागरूकता, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक अवसरों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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