ई-डिटेक्शन के परिवादों पर अफसरों की सुस्ती, 9607 प्रकरण लंबित
प्रकरणों का निस्तारण करना होगा
जयपुर। परिवहन विभाग से जुड़ी 11,610 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से 9,607 शिकायतें अभी अधिकारियों के पास लंबित हैं। इनमें ई-डिटेक्शन और अन्य चालानों से जुड़े परिवाद भी शामिल हैं। कई प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें अगले पांच दिन में निर्णय लेना जरूरी है। समय पर कार्रवाई नहीं होने पर ये चालान स्वतः जीरो हो जाएंगे। प्रदेशभर में ऐसे प्रकरणों की संख्या 6,513 बताई जा रही है।
आरटीओ स्तर पर मनीष कुमार शर्मा के पास 147, खीन्द्र जोशी के 141, अनिल पांड्या के 137 और नेमीचंद पारीक के पास 131 प्रकरण लंबित हैं। वहीं डीटीओ स्तर पर ओमप्रकाश चौधरी के पास 150 और ताराचंद के पास 148 प्रकरण लंबित हैं।
ई-डिटेक्शन व्यवस्था का उद्देश्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर ऑनलाइन कार्रवाई को गति देना है। लेकिन बड़ी संख्या में परिवाद लंबित रहने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों को समय सीमा के भीतर इन प्रकरणों का निस्तारण करना होगा, ताकि चालान स्वतः समाप्त होने की स्थिति न बने।

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