ताहा शाह बदुशा की फिल्म ‘पारो’ ऑस्कर की आधिकारिक एलिजिबिलिटी लिस्ट में शामिल, ब्राइड स्लेवरी पर बनी फिल्म को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान
फिल्म का निर्माण फिल्ममेकर और सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति भोईर ने किया
ताहा शाह बदुशा अभिनीत फिल्म ‘पारो-द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ब्राइड स्लेवरी’ ऑस्कर 2026 की आधिकारिक एलिजिबिलिटी लिस्ट में शामिल हुई है। तृप्ति भोईर निर्मित और गजेंद्र अहिरे निर्देशित यह फिल्म दुल्हन तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे को उठाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा चुकी है।
मुंबई। ताहा शाह बदुशा अभिनीत फिल्म ‘पारो-द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ब्राइड स्लेवरी’ 98वें अकादमी अवॉड्र्स (ऑस्कर) 2026 के लिए एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आट्र्स एंड साइंसेज द्वारा जारी आधिकारिक ऑस्कर एलिजिबिलिटी लिस्ट में शामिल की गई है। इसके साथ ही ‘पारो’ उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की सूची में आ गई है, जिन्होंने अकादमी के तय मानकों और योग्यता शर्तों को पूरा किया है।
फिल्म का निर्माण फिल्ममेकर और सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति भोईर ने किया है, जबकि निर्देशन की कमान प्रख्यात निर्देशक गजेंद्र अहिरे ने संभाली है। ‘पारो’ एक संवेदनशील और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म है, जो दुल्हन तस्करी यानी ब्राइड ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर और अनदेखे मुद्दे को सामने लाता है। फिल्म में ताहा शाह बदुशा के साथ तृप्ति भोईर और गोविंद नामदेव भी अहम भूमिकाओं में हैं। अपनी विषयवस्तु और प्रभावशाली कहानी के चलते फिल्म अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों और सर्किट्स में पहले ही सराहना बटोर चुकी है।
ऑस्कर एलिजिबिलिटी लिस्ट में शामिल होना फिल्म की कलात्मक गुणवत्ता, सामाजिक प्रासंगिकता और अकादमी के सबमिशन व स्क्रीनिंग नियमों के अनुरूप होने को दर्शाता है। हालांकि, यह सीधे नामांकन की गारंटी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अवॉड्र्स की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ताहा शाह बदुशा ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- मुझे बेहद गर्व और सम्मान महसूस हो रहा है कि ‘पारो’ को ऑस्कर एलिजिबिलिटी लिस्ट में जगह मिली है। यह फिल्म मेरे लिए सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि उन आवाजों का प्रतिनिधित्व है, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। यह एक ऐसी कहानी है, जिसे सरहदों से परे देखा और सुना जाना चाहिए। मैं पूरी टीम और उन सभी लोगों का आभारी हूं, जिन्होंने इस सफर पर भरोसा किया। उम्मीद है कि यह पहचान अर्थपूर्ण सिनेमा के लिए नए दरवाजे खोलेगी, जो संवेदना, जागरूकता और बदलाव को प्रेरित करे।
गौरतलब है कि ऑस्कर एलिजिबिलिटी के साथ ‘पारो’ ने वैश्विक स्वतंत्र सिनेमा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामाजिक सरोकारों से जुड़ी भारतीय कहानियों की बढ़ती पहचान को भी रेखांकित करती है।

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