अदृश्य आपदाः शहरी जल संकट

हर बूंद भविष्य की सुरक्षा

अदृश्य आपदाः शहरी जल संकट
जल, जो मानव जीवन का सबसे आवश्यक आधार है, आज दुनिया के अनेक शहरों में तेजी से दुर्लभ होता जा रहा है।

21वीं सदी को तीव्र शहरीकरण, तकनीकी प्रगति और आर्थिक परिवर्तन का युग कहा जाता है। दुनिया भर के शहर अभूतपूर्व गति से विस्तार कर रहे हैं। बेहतर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक जीवनशैली की तलाश में लाखों लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। ऊंची इमारतें, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, आधुनिक परिवहन और औद्योगिक विकास आज शहरी प्रगति के प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन इस चमकदार विकास के पीछे एक गंभीर और तेजी से बढ़ता संकट छिपा हुआ है शहरी जल संकट। जल, जो मानव जीवन का सबसे आवश्यक आधार है, आज दुनिया के अनेक शहरों में तेजी से दुर्लभ होता जा रहा है।

शहरी जल संकट :

आज शहरी जल संकट भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। जो शहर कभी नदियों, झीलों और भूजल संसाधनों से समृद्ध थे, वे अब पानी की कमी, जल राशनिंग, टैंकर निर्भरता और जल असमानता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो शहरी जल संकट इस शताब्दी की सबसे बड़ी मानवीय, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों में बदल सकता है। शहरों द्वारा अपनी आबादी को पर्याप्त, सुरक्षित और सुलभ जल उपलब्ध कराने में असमर्थ होना है। कुछ क्षेत्रों में यह समस्या प्राकृतिक रूप से हो सकती है, लेकिन आज अधिकांश शहरी जल संकट मानव निर्मित है। तेजी से बढ़ते शहरों ने जल संसाधनों पर भारी दबाव डाला है। घरेलू उपयोग, उद्योगों, निर्माण कार्यों, स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए शहरों में अत्यधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से शहरी विस्तार जल संसाधनों और बुनियादी ढांचे के समुचित विकास के बिना हुआ है।

पुनर्भरण रुक जाता है :

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परिणामस्वरूप वर्षा का पानी जमीन में समाने के बजाय नालों और नदियों में बह जाता है, जिससे एक ओर शहरी बाढ़ आती है और दूसरी ओर भूजल पुनर्भरण रुक जाता है। यही कारण है कि आज शहर वर्षा ऋतु में बाढ़ और गर्मियों में जल संकट, दोनों समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बढ़ते तापमान के कारण जल की मांग बढ़ रही है और वाष्पीकरण की दर भी तेज हो रही है। वर्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कहीं लंबे सूखे पड़ रहे हैं तो कहीं अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में कम दिनों में अधिक बारिश होगी। आज कई शहरों में कुछ घंटों में पूरे मौसम के बराबर बारिश हो रही है। लेकिन शहरी संरचनाएं इतनी सक्षम नहीं हैं कि इस पानी को संरक्षित कर सकें। परिणामस्वरूप अधिकांश वर्षाजल बहकर नालों में चला जाता है। जलवायु परिवर्तन जल संकट को स्थानीय समस्या से वैश्विक अस्तित्व के संकट में बदल रहा है। भूजल दोहन एक अदृश्य आपदा है। शहरी जल संकट का सबसे गंभीर पक्ष भूजल का लगातार गिरता स्तर है।

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समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं :

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भूजल स्तर गिरने से अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। पानी निकालने की लागत बढ़ रही है, बोरवेल सूख रहे हैं, जल गुणवत्ता खराब हो रही है, भूमि धंसाव की समस्या उत्पन्न हो रही है, गरीब और वंचित समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसीलिए भूजल संकट को अदृश्य आपदा कहा जाता है। जल संकट केवल पानी की कमी का प्रश्न नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता का भी मुद्दा है। शहरों की नदियां, झीलें और भूजल स्रोत अशोधित मलजल औद्योगिक कचरे, प्लास्टिक और रासायनिक प्रदूषण से दूषित होते जा रहे हैं। कई शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम या तो अपर्याप्त हैं या ठीक से कार्य नहीं कर रहे। बड़ी मात्रा में गंदा पानी सीधे नदियों और झीलों में छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही पाइपलाइन लीकेज और कमजोर वितरण प्रणाली भी समस्या को बढ़ाती है।

नए दृष्टिकोण से देखें :

आज आवश्यकता इस बात की है कि शहर पानी के साथ अपने संबंध को नए दृष्टिकोण से देखें। अब केवल अधिक पानी लाने और सप्लाई बढ़ाने का मॉडल टिकाऊ नहीं रह गया है। भविष्य की शहरी जल नीति जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जल पुनर्चक्रण, विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी, जलवायु अनुकूलन क्षमता निम्न सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। शहरों को जल उपभोग की मानसिकता से जल संरक्षण की संस्कृति की ओर बढ़ना होगा। सिद्धांत सरल है जहां पानी गिरे, वहीं उसे रोकें। हर घर, विद्यालय, सरकारी भवन, मॉल, पार्किंग और आवासीय परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य होना चाहिए। इससे वर्षाजल को सीधे उपयोग में लाया जा सकता है या भूजल पुनर्भरण के लिए जमीन में पहुंचाया जा सकता है। इसके अनेक लाभ हैं। भूजल पर निर्भरता कम होती है, शहरी बाढ़ कम होती है, भूजल स्तर सुधरता है, स्थानीय जल उपलब्धता बढ़ती है, नगर जल आपूर्ति प्रणाली पर दबाव घटता है।

हर बूंद भविष्य की सुरक्षा :

शहरी जल संकट गरीबों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। अमीर लोग बोतलबंद पानी, निजी बोरवेल और टैंकर खरीद सकते हैं, लेकिन गरीब समुदायों को मूलभूत जल सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। इसलिए स्वच्छ जल तक पहुंच को मौलिक मानव अधिकार माना जाना चाहिए। शहरी जल संकट 21वीं सदी की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक सद्भाव , सभी को प्रभावित करता है। लेकिन यह ऐसा संकट नहीं है जिसका समाधान संभव हो। वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल पुनर्चक्रण, स्मार्ट जल प्रबंधन, जल संवेदनशील शहरी नियोजन, सामुदायिक भागीदारी समाधान हैं आवश्यकता केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास की है।हमें यह समझना होगा कि पानी असीमित संसाधन नहीं, बल्कि साझा प्राकृतिक धरोहर है। आज बचाई गई हर बूंद भविष्य की सुरक्षा है।

-डॉ. रिपुन्जय सिंह

यह लेखक के अपने विचार हैं।

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