झीलों की नगरी में अघोषित वाटर इमरजेंसी : स्टोरेज के फेर में शहर के पानी पर कैंची, शहर में गहराया जल संकट

नलों से पानी की जगह आ रही हवा

झीलों की नगरी में अघोषित वाटर इमरजेंसी : स्टोरेज के फेर में शहर के पानी पर कैंची, शहर में गहराया जल संकट
झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही। शहर का वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह लड़खड़ाता नजर आ रहा। विभाग ने पहले पुराने शहर के 18 वार्डों में दो दिन में एक बार जलापूर्ति की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन अब यही स्थिति लगभग पूरे शहर में अघोषित रूप से लागू।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। शहर का वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह लड़खड़ाता नजर आ रहा है। विभाग ने पहले पुराने शहर के 18 वार्डों में दो दिन में एक बार जलापूर्ति की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन अब यही स्थिति लगभग पूरे शहर में अघोषित रूप से लागू हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में पांच-पांच दिन बाद भी नलों से पानी की बजाय सिर्फ हवा निकल रही है। शहर के मीरा नगर क्षेत्र में लोग पिछले एक माह से टैंकरों के सहारे जीवनयापन कर रहे हैं, वहीं हिरणमगरी सेक्टर-3, 4, 5, 7 तथा सेक्टर-11, 12, 13 और 14 में अघोषित बिजली कटौती की तर्ज पर अघोषित जल कटौती से लोग परेशान हैं। जलापूर्ति कब होगी, कितनी देर होगी और कितने दबाव से होगी, इसकी कोई निश्चितता नहीं है। एक ओर नागरिक पानी के लिए भटक रहे हैं, दूसरी ओर विभाग भविष्य के संकट को देखते हुए जल भंडारण में जुटा हुआ है। इसी कारण वर्तमान में जलापूर्ति प्रभावित हो रही है और आगामी 15 दिनों तक स्थिति में विशेष सुधार की संभावना नहीं है। शहर के रघुनाथपुरा, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय परिसर और देबारी के कई इलाकों में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है। स्थिति यह है कि कई बोरवेलों से पानी के स्थान पर कीचड़ निकलने लगा है, जिससे संकट और गहरा गया है।

 खपत से कम हो रही जलापूर्ति
शहर की दैनिक पेयजल आवश्यकता करीब 162 एमएलडी बताई जा रही है, लेकिन वर्तमान में इससे काफी कम मात्रा में जलापूर्ति हो रही है। इस समस्या को लेकर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने भी संयुक्त शासन सचिव से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जयसमंद से उदयपुर आने वाली पुरानी पाइपलाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने से सप्लाई प्रभावित होती है। शासन स्तर पर पाइपलाइन सुधार कर समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी
पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता रवींद्र चौधरी के अनुसार, इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका के मद्देनजर जून और जुलाई के लिए 300 एमएलडी पेयजल भंडारण की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि आगामी भीषण गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए अभी से व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं, जिससे शहर को भविष्य में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। 

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