राज काज में क्या है खास, जानें

चर्चा पावरफुल होने की

राज काज में क्या है खास, जानें
भगवा वाले भाई लोगों में पिछले दिनों से एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी और किसी की नहीं बल्कि खुद की पार्टी में हो रही राजनीति की है।

चर्चा में मैसेज की राजनीति :

भगवा वाले भाई लोगों में पिछले दिनों से एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी और किसी की नहीं बल्कि खुद की पार्टी में हो रही राजनीति की है। सरदार पटेल मार्ग पर बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर हार्ड कोर वर्कर्स में चर्चा है कि दिल्ली वालों की राजनीति का कोई सानी नहीं है। जो कुछ करते हैं, तो उसके पीछे कोई कोई संदेश होता है। अब देखो , चार जुलाई को गुलाबीनगर में जो कुछ हुआ, उससे गांव-गांव और ढाणी-ढाणी में बैठे वर्कर्स मायने निकाल रहे हैं। बेचारों को कतई उम्मीद नहीं थी कि जिस मैडम को जोधपुर जाना था, उससे दिल्ली वाले पिंकसिटी में होने वाले पीएम के स्टेट लेवल के प्रोग्राम की जिम्मेदारी सौंप कर बड़ा मैसेज देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अब दिल्ली वालों के इस मैसेज को समझने वाले समझ गए, समझे वो अनाड़ी है।

करे कोई, भरे कोई :

पिछले दिनों केन्द्र के पेड़ पौधे वाले महकमे में जो कुछ हुआ, उसके साइड इफेक्ट को लेकर कई भाई लोगों की नींद उड़ गई। चिन्ता के मारे वे दुबले भी हो गए। वे तो ढंग से सो पा रहे हैं और खा-पी पा रहे हैं। राज का काज करने वालों में खुसरफुसर है कि अलवर वाले भाई साहब से जुड़े चार अफसरों ने बड़ी उम्मीदों से धन्नासेठ को क्लीरियेंस सर्टिफिकेट देने में दिन रात पसीने बहाए थे, मगर बड़े लोगों की लड़ाई में  मामला उलटा पड़ गया। बेचारों को पता नहीं था कि झगड़ा हाथ वालों और भगवा वालों के बीच का नहीं, बल्कि अपनों के बीच चल रही गलतफहमियों की वजह से आग की लपटें बड़े लोगों तक पहुंच सकती हैं। 

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चर्चा पावरफुल होने की :

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सरदार पटेल मार्ग पर बंगला नंबर 51 में भगवा वालों के ठिकाने पर बड़ी कुर्सियों को लेकर दिनभर कई तरह के चर्चे हो रहे हैं। चर्चे भी बोर्ड और निगमों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों में पॉवरफुल को लेकर है। सत्ता और संगठन वाले दोनों भाई साहब जब भी एक साथ ठिकाने पर आते हैं, तो चर्चा जोर पकड़ लेती है। पिछले दिनों ठिकाने पर एक लिफाफा हवा में लहराने के बाद तो चर्चे ने और भी जोर पकड़ लिया था। अब बिना सिर पैर की बातें बनाने वाले भगवा वाले भाइयों को कौन समझाए कि पॉवरफुल तो वही होता है, जो सरकार चलाता है। अब समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है। 

एक जुमला यह भी :

सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि खाकी वाले महकमें के बड़े साहब से ताल्लुक रखता है। जुमला भी पीएचक्यू से लेकर सचिवालय तक चल रहा है। जुमला है कि तुला राशि वाले बड़े साहब के एक्सटेंशन को लेकर खाकी वाले साहब लोगों का एक खेमा रात-दिन पसीने बहाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। एक्सटेंशन के पक्ष वाले गु्रप के लीडर भी छोटे मोटे नहीं बल्कि दिल्ली वाले साहब के काफी नजदीक हैं। खाकी वाले साहब लोग तो हवा का रुख देखकर सलाम करने में माहिर होते हैं, जो उसमें तो कोई कमी नहीं छोड़ रहे। अब खाकी वाले साहब लोगों को कौन समझाए कि बड़ी कुर्सी के दिन में ही सपने देख रहे दिल्ली वाले तो खुद ही अपनी सेंकने के लिए पैतरे पर पैतरा बदल रहे हैं।

-एल. एल. शर्मा

(यह लेखक के अपने विचार हैं

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