इंदौर त्रासदी से सबक लेने की जरूरत
पेयजल संकट बरकरार
बीते दिनों देश के सर्वाधिक स्वच्छ शहर के नाम से विख्यात इंदौर शहर के भगीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी के सेवन के कारण लोगों की मौतों का सिलसिला अभी थमा नहीं है।
बीते दिनों देश के सर्वाधिक स्वच्छ शहर के नाम से विख्यात इंदौर शहर के भगीरथपुरा क्षेत्र में प्रदूषित पानी के सेवन के कारण लोगों की मौतों का सिलसिला अभी थमा नहीं है। अभी भी अस्पतालों में लोग भर्ती हैं जिनमें कई की हालत ज्यादा गंभीर है और कुछ आई सी यू में भर्ती हैं और वे जिंदगी की आखिरी जंग लड़ रहे हैं। हालात की गंभीरता का आलम यह है कि इंदौर में बोरिंग के पानी तक में मल-मूत्र वाला वैक्टीरिया पहुंच गया है। लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं और तकरीब एक हफ्ते बाद भी यहां के लोग पीने के पानी के लिए टैंकरों के भरोसे हैं। यह हालत जब देश के सर्वाधिक स्वच्छ शहर की है, उस दशा में देश के दूसरे शहरों की हालत क्या होगी। यह बात आसानी से समझ में आ जाती है।
दूषित पेयजल की समस्या :
विडम्बना देखिए यह हालत अकेले इंदौर की ही नहीं है, गुजरात का गांधीनगर भी इंदौर जैसे हालात का सामना कर रहा है। देश की राजधानी दिल्ली भी दूषित पेयजल की समस्या से अछूती नहीं है। एन जी टी की सख्ती के बाद अब कहीं जाकर दिल्ली जल बोर्ड ने सुध ली है और इस इलाके की दशकों पुरानी और छतिग्रस्त पाइप लाइन बदलने का काम शुरू किया है। जहां तक इंदौर का सवाल है, यह मामला पूरी तरह सरकारी लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। हकीकत में इंदौर के भगीरथपुरा के लोग काफी दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे। वे 26 दिसम्बर से ही दूषित पानी पीने को मजबूर थे। लेकिन जिला प्रशासन और अधिकारियों पर उनकी शिकायतों का कोई असर ही नहीं हुआ। उनकी कुंभकर्णी नींद तब खुली जब दूषित पानी पीने से दस्त और उल्टी से लोगों की मौत होने लगीं और पीड़ित लोगों की तादाद 3000 के पार पहुंच गई।
हरसंभव नि:शुल्क इलाज :
तब हाई कोर्ट ने तत्काल लोगों को साफ पीने का पानी मुहैय्या कराने और पीड़ितों का हरसंभव निशुल्क इलाज कराने का आदेश दिया। तब सरकार ने मृतकों के आश्रितों को दो लाख मुआवजा दिये जाने की घोषणा के साथ नगर निगम के अपर आयुक्त, जल कार्य निगम के अधीक्षण अभियंता को निलंबित और आयुक्त को हटाने के साथ तीन नगर आयुक्तों की नियुक्ति कर और उस इलाके में सप्लाई किये जाने वाले नर्मदा के पानी के सैंपल लेने का काम शुरू किया। जब जांच में उसमें मल-मूत्र मिश्रित होने की पुष्टि हुयी तब नगर निगम ने वहां के बोरिंग के पानी के सैंपल लिए। बोरिंग के 69 सैंपलों में से 35 जांच में फेल पाये गये हैं और जांच में नर्मदा जल के बाद अब बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म वैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है, जिससे हैजा फैला।
मेडीकल कॉलेज की रिपोर्ट :
जिला प्रशासन भी इसकी पुष्टि करता है। इंदौर मेडीकल कालेज की रिपोर्ट भी यह पुष्टि करती है कि भागीरथपुरा में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने का पानी दूषित हुआ और यह बीमारी फैली। जाहिर है कि पानी की टूटी पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिला जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुयी। चिंतनीय तो यह है कि भगीरथ पुरा के निजी और सार्वजनिक बोरिंग के पानी की जांच में वैक्टीरिया पाये जाने का मतलब है कि क्षेत्र के नलकूपों का पानी पीना तो दूर ,रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी सुरक्षित नहीं है। अस्पतालों में भर्ती पीड़ित रोगियों में टायफायड के लक्षण भी पाये गये हैं। डाक्टरों का तो इन पीडितों में हैपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने का अंदेशा है। डाक्टरों का कहना है कि उल्टी-दस्त के संक्रमण के कारण कुछ मरीजों की किडनी भी बुरी तरह प्रभावित हुयी है।
पेयजल संकट बरकरार :
अभी भी प्रभावित क्षेत्र भगीरथपुरा में पेयजल संकट बरकरार है। एन एच आर सी ने भी इंदौर के भगीरथ पुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर उनसे दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अस्पताल जाकर मरीजों का कुशल क्षेम जाना और मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठायेगी, व मृतकों को दो लाख राहत के तौर पर देने की घोषणा की है। इंदौर की त्रासदी तो महज एक बानगी है, जबकि देश में नीति आयोग की मानें तो हर साल दूषित पानी पीने से दो लाख लोगों की मौत होती है।
अनियमिततओं की भूमिका :
नीति आयोग की मानें तो देश में तकरीब 60 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी मयस्सर नहीं है। इससे 6 फीसदी जी डी पी का नुकसान होता है। हकीकत में देश का 70 फीसदी पीने का पानी प्रदूषित है। पेयजल की गुणवत्ता के मामले में हमारे देश का दुनिया के 122 देशों में 120वां स्थान है और दुनिया के 20 पीने के पानी के मामले में संकटग्रस्त शहरों में देश के छह शहर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और बैंगलुरू शामिल हैं। असलियत में दूषित पीने के पानी पीने से होने वाली मौतें विकास के दावों को मुंह चिड़ाती प्रतीत होती हैं। इससे जल जीवन मिशन की नाकामी साबित होती है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था में नाकामी में अनियमिततओं की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। हकीकत में पीने के पानी की लाइनों का बरसों पुराना होना, उनकी मरम्मत और देखभाल का अभाव, खराब योजना व डिजाइन, जल संचय का अपर्याप्त प्रबंधन, शुद्धिकरण के लिए व्यवस्था और निगरानी की कमी और उपभोक्ता के स्तर पर घरों से पानी के सैंपल लेकर जांच की व्यवस्था न होने के साथ भ्रष्टाचार वह अहम कारण हैं।
-ज्ञानेन्द्र रावत
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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