भारत-ब्रिटेन के बीच साझेदारी का नया अध्याय

नई ऊर्जा मिलेगी 

भारत-ब्रिटेन के बीच साझेदारी का नया अध्याय
पिछले सप्ताह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने देश के व्यापार, शिक्षा, तकनीकी एवं संस्कृति क्षेत्र से जुड़े सवा सौ प्रतिनिधियों के साथ पहली आधारिक यात्रा पर भारत आए।

पिछले सप्ताह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने देश के व्यापार, शिक्षा, तकनीकी एवं संस्कृति क्षेत्र से जुड़े सवा सौ प्रतिनिधियों के साथ पहली आधारिक यात्रा पर भारत आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों ने बिना किसी परेशानी के व्यापारिक संबंधों को गहराई देते हुए मजबूत किया है। दूसरे शब्दों में यह समझौता ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा। कहने को तो स्टार्मर का यह दौरा एक बड़े ह्यव्यापार मिशनह्ण के रूप में माना गया, लेकिन इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा-सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और अनुसंधान के अतिरिक्त रणनीतिक साझेदारी से जुड़े अहम समझौते हुए। जिनसे दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावनाएं भी जाहिर की गई हैं। समझौते की सफलता के दावे के साथ इसे दोनों देशों के संबंधों का एक नया अध्याय भी बताया गया है।

कूटनीतिक परिपक्वता :

यह समझौता ऐसे वक्त किया गया जब दोनों देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से परेशान हैं। यह कूटनीतिक परिपक्वता का उदाहरण भी है। समझौते के प्रभाव का असर, अमेरिकी शासन अब पहले से हुए समझौतों की रूपरेखा बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कम तनावपूर्ण और नाटकीय रही है। फिर भी हमें इस सच्चाई को ध्यान में रखना होगा कि वार्ताकारों के सकारात्मक आश्वासन और समझौते की प्रगति में कुछ अंतर होता है। खैर, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की ओर से जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन को स्वाभाविक साझेदार बताया तो स्टार्मर ने नई दिल्ली के साथ साझेदारी को विकास का लांचपैड बताया। द्विपक्षीय बातचीत दौरान तकनीकी, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, एआई, विद्युत इंजन और अनुसंधान समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर जो सहमति बनी वह अहम है।

मिसाइलों की आपूर्ति :

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ब्रिटेन भारत को थेल्स द्वारा निर्मित हल्की बहुद्देशीय मार्टलेट मिसाइलों की आपूर्ति करेगा। यह वही मिसाइल है, जो रूस के साथ संघर्ष में यूक्रेन को दी जा रही है। इससे भारतीय सेना को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह अनुबंध 350 मिलियन पौंड का हुआ है। इसके अतिरिक्त 250 मिलियन पौंड के नौसैनिक जहाजों के लिए विद्युत चालित इंजनों पर सहयोग आगे बढ़ाने का समझौते हुआ है। भारत की 64 कंपनियों ने कुल 1.3 अरब का निवेश करने की घोषणा की जिससे ब्रिटेन में लगभग सात हजार नौकरियां सृजित होंगी। ब्रिटेन सरकार का दावा है कि दोनों देशों के बीच निवेश से कुल 10,600 नौकरियां सृजित होंगी। सहयोग की एक पहल में बॉलीवुड का यशराज फिल्मस ग्रुप अपनी तीन फिल्मों को निर्माण ब्रिटेन में करेगा। जिससे वहां के हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिज क्रिटिकल मिनरल्स और हरित प्रौद्योगिकी सहयोग गिल्ड गठित करने पर सहमति बनी। ब्रिटेन के दो विश्वविद्यालयों को भारत में नए कैंपस खोलने की अनुमति दी जाएगी, ताकि शैक्षिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ सके।

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समझौते के तहत :

ब्रिटिश कंपनियों को भारत में प्रवेश के अवसर उपलब्ध होंगे। भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्रोतों और बाजारों तक पहुंच मिलेगी। व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आने वाले सामानों पर भारत औसत टैरिफ 15 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी करेगा। वहीं, भारत से ब्रिटेन निर्यात होने वाले 99 फीसदी उत्पादों पर टैरिफ खत्म करने का प्रस्ताव है। इस समझौते से दोनों देशों के व्यापारियों और उपभोक्ताओं को फायदा होगा। रोजगार के मौके बढ़ेंगे। दोनों देशों के बीच करीब 56 अरब डॉलर का व्यापार है जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। बड़े समझौते बड़े उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक फायदेमंद होते हैं, जबकि छोटे उद्योग, कृषि या कुटीर उद्योगों को लाभ कम मिलता है। समझौते से कर राजस्व की हानि हो सकती है। भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों पर राष्ट्रीय बीमा में छूट देने से ब्रिटेन को 200 मिलियन पौंड का सालाना घाटा वहन करना पड़ सकता है। ब्रिटेन के भीतर वीजा और आव्रजन नीति को लेकर संघर्ष हो सकता है।

नई ऊर्जा मिलेगी :

स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा में वीजा मुद्दा नहीं है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि स्टार्मर की यात्रा से भारत-ब्रिटेन संबंधों को एक नई ऊर्जा मिलेगी, खासकर व्यापार और रणनीति क्षेत्रों में। व्यापार समझौते के समय सामाजिक सुरक्षा, कर व्यवस्था, नियम-विधि, विवाद समाधान जैसे पहलुओं को पहली योजना में शामिल करना चाहिए। कुल मिलाकर कीर स्टार्मर की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नई इबारत लिखने की कोशिश है। ऐसे में व्यापार समझौते के क्रियान्वयन प्रक्रिया, रक्षा साझेदारी, निवेश घोषणाएं और रणनीतिक संवाद ने यात्रा को महत्व प्रदान किया है। हालांकि चुनौतियां और सीमाएं स्वाभाविक हैं। मसलन-राजस्व हानि, लाभ-वितरण में असमानताएं, असंतुलन हो सकता है, लेकिन यदि दोनों सरकारें समयबद्ध, पारदर्शी और साझा दृष्टिकोण से काम करे, तो यह यात्रा दीर्घकालिक रूप से दोनों देशों को लाभ पहुंचा सकती है।

द्विपक्षीय समझौते :

यहां बता दें कि बड़े ब्रिटिश दल के आने से डील को जल्द लागू करने में मदद मिलेगी। इस क्रम में संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा हुई। ट्रंप की ओर से चीन और बांग्लादेश पर कम टैरिफ लगाने से भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में अगले साल दस फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। ऐसे में ब्रिटेन से की गई डील इस कमी की भरपाई कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर दोनों ही अगर द्विपक्षीय समझौतों को ऐतिहासिक मान रहे हैं, तो इसकी वजह मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां हैं। दोनों पर अमेरिका का दबाव है और इन मुलाकातों ने उनको नए विकल्प दिए हैं। जिसका निश्चित तौर पर फायदा वाशिंगटन के साथ बात करते समय होगा।

-महेश चंद्र शर्मा
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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