सरकार भी नहीं खोल पाई प्रसूताओं के मौत के कारण, अब तक प्रशासन की जांच अधूरी
सरकार, चिकित्सा विभाग और औषधि नियंत्रण विभाग ने साधी चुप्पी
कोटा। कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का कारण रहस्य बना हुआ है। घटना को 51 दिन बीत चूके हैं, इसके बावजूद चिकित्सा विभाग कारणों को जाहिर नहीं कर सकी। जबकि, दिल्ली एम्स की हाई लेवल कमेटी सहित जयपुर एसएमएस, मेडिकल कॉलेज हॉस्टिल की ने अपनी रिपोर्ट चिकित्सा मंत्री को सौंप दी है, लेकिन मंत्री ने इस मामले में अब तक कोई खुलासा नहीं किया है। हालात यह है कि गंभीर मामले में जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे है। गत माह पहले संभागीय आयुक्त के निर्देश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में मामले की जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देनी थी लेकिन वह भी अब तक नहीं दी गई। वहीं, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की हालत भी डायलिसस के भरोसे ही कट रही है। उनकी तबीयत में अभी तक अपेक्षाकृत सुधार नजर नहीं आ रहा।
चार जांच टीमें गठित फिर भी हाथ खाली
कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल्योर मामले ने जब तूल पकड़ा तो शासन-प्रशासन ने चिकित्सा विशेषज्ञों की 4 टीमें गठित कर दी। इनमें दिल्ली एम्स, जयपुर एसएमएस, कोटा मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा विशेषज्ञों की टीमों ने दवाइयां, सर्जिकल आइटम, ओटी इंफेक्शन और चिकित्सकों की भूमिका सहित हर एंगल पर जांच-पड़ताल की। इसके अलावा जिला प्रशासन ने भी लॉकल परचेज की दवाओं की जांच व खरीद से संबंधित दस्वाजों की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की। इसके बावजूद मौत के कारण उजागर नहीं हो सके।
एक माह बाद भी पुलिस ने नहीं की जांच
गत 26 मई को आई दवाओं की जांच रिपोर्ट में फेल मिले इंजेक्शन प्रसूताओं को लगाए गए थे, लेकिन काम नहीं करने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई। मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा की ओर से संबंधित फर्म की दवा फेल होने व पूरे घटनाक्रम को लेकर महावीर नगर पुलिस थाने में जांच को लेकर परिवाद भी दिया था लेकिन पुलिस की ओर से भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर, थानाधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि अधीक्षक की ओर से परिवार मिला था, अभी दवा फेल के सैंपल नहीं दिए गए हैं। जल्द ही सैंपल लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब तक प्रशासन की जांच अधूरी
प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल्योर मामले को लेकर संभागीय आयुक्त अनिल अग्रवाल के निर्देश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की गई थी, जो अस्पतालों द्वारा लॉकल परचेज पर खरीदी गई दवाओं के दस्तावेज, खरीद रिकॉर्ड, कौनसी दवा और क्यों खरीदी गई, टेंडर, बिल, डिमांड व एनओसी सहित कई बिंदुओं की जांच करनी थी। जिसकी रिपोर्ट 7 दिन में पेश करनी थी लेकिन 20 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, इसके बावजूद अभी प्रशासन की जांच का अता-पता नहीं है।
इन प्रसूताओं की हो चुकी है मौत
प्रिया, पिंकी महावर, ज्योति, पूजा और शिरीन की मौत हो चुकी है।
इनका चल रहा इलाज
आरती, रागिनी, धन्नी, सुशीला और पिंकी का उपचार जारी है।

Comment List