टेंडर में कम कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्वालिटी
आधुनिक तकनीक और बेहतर परीक्षण व्यवस्था उपलब्ध
आमतौर पर ये देखा गया है कि सरकारी टेंडरों में अक्सर क्वालिटी की बजाय सबसे कम रेट लगाने वाले को टेंडर दे दिया जाता है। लेकिन सिर्फ कम कीमत को आधार बनाना सही नहीं होता। कई बार ठेकेदार कम दर पर काम तो ले लेते हैं, लेकिन बाद में क्वालिटी से समझौता कर देते हैं। ज्यादातर मामलों में इसका नतीजा यह होता है कि सड़कें, पुल और अन्य सरकारी परियोजनाएं कुछ ही वर्षों में खराब होने लगती हैं और उनमें कई तरह की कमियां सामने आती हैं। शुरूआत में लगता है कि कम कीमत पर टेंडर देने से पैसे बच गए, लेकिन बाद में मरम्मत और रखरखाव पर उससे भी ज्यादा खर्च करना पड़ता है। इससे जनता के पैसे का नुकसान होता है बल्कि साख और जनता का विश्वास भी प्रभावित होता है। कहावत है, ‘सस्ता रोए बार-बार, महंगा रोए एक बार।’ यही बात सरकारी परियोजनाओं पर भी लागू होती है। अगर शुरूआत में ही अच्छी क्वालिटी वाले निर्माण पर ध्यान दिया जाए, तो परियोजनाएं लंबे समय तक टिकाऊ रहती हैं और बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए टेंडर आवंटन में केवल सबसे कम बोली को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसके बजाय क्वालिटी और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे मानदंडों को महत्व दिया जाना चाहिए। जिन कंपनियों का कार्य रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो और जो निर्धारित क्वालिटी मानकों को सिद्ध कर चुकी हों, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। बीएसएफ और एमईसी जैसी एजेंसियों द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडरों की लागत सामान्यत: अधिक होती है, किंतु इनके अंतर्गत निर्मित सड़कें उच्च क्वालिटी, मजबूती और दीर्घकालिक टिकाऊपन के लिए जानी जाती हैं। महंगी होने के बावजूद इन परियोजनाओं में क्वालिटी मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है। दूसरा, ठेकेदार को कार्य प्रारंभ करने और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के लिए अग्रिम भुगतान अथवा मोबिलाइजेशन फंड की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, सुचारु एवं प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सकता है। आज के समय में क्वालिटी की जांच के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर परीक्षण व्यवस्था उपलब्ध है। इनके उपयोग से निर्माण कार्यों की क्वालिटी सुनिश्चित की जा सकती है।अल्पकालिक बचत के लिए क्वालिटी से समझौता करना उचित नहीं है, क्योंकि इसका आर्थिक और सामाजिक मूल्य भविष्य में कहीं अधिक चुकाना पड़ता है। अत: सरकारी परियोजनाओं में लागत से अधिक महत्व क्वालिटी, टिकाऊपन को दिया जाना चाहिए। उच्च क्वालिटी वाले निर्माण कार्य लंबे समय तक जनता को लाभ पहुंचाते हैं और अंतत: अधिक किफायती सिद्ध होते हैं। उद्देश्य केवल कम खर्च करना नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता के पैसे का सही और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना होना चाहिए। क्वालिटी पर किया गया खर्च वास्तव में एक निवेश है, जिसका लाभ जनता को लंबे समय तक मिलता है।
- नरेंद्र चौधरी

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