राजस्थान में बेहतर होती मातृत्त्व स्वास्थ्य व्यवस्था से मृत्यु दर में कमी

जवाबदेह कार्यप्रणाली

राजस्थान में बेहतर होती मातृत्त्व स्वास्थ्य व्यवस्था से मृत्यु दर में कमी
सभ्य और संवेदनशील समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से होता है कि वह माताओं और नवजात शिशुओं को कितना सुरक्षित जीवन दे पा रहा है।

सभ्य और संवेदनशील समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से होता है कि वह माताओं और नवजात शिशुओं को कितना सुरक्षित जीवन दे पा रहा है। स्वास्थ्य सूचकांक, मातृ मृत्यु दर, शासन की संवेदनशीलता, चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता और समाज के समग्र विकास का दर्पण है। राजस्थान ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपनाई गई नीतियों और सतत निगरानी का सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य में मातृ मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2022-24 के अनुसार राजस्थान का मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गया है।

राजस्थान का पीसीटीएस :

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इसमें लगातार कमी आई है और राज्य अब राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुंच गया है। राज्य में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 94.1 प्रतिशत हो गया है। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि गर्भवती महिलाओं का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ा है तथा सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की रणनीति प्रभावी रही है। राजस्थान का पीसीटीएस (Pregnancy, Child Tracking & Health Services Management System) गर्भवती महिलाओं की ऑनलाइन ट्रैकिंग और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध निगरानी के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब पीसीटीएस के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

सेवाओं की बेहतर उपलब्धता :

Read More राजस्थान में मुद्रा योजना से 2.55 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिला 2.18 लाख करोड़ रुपए का ऋण, महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक

पीसीटीएस के अनुसार राज्य में मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्ष 2023-24 में 82 से घटकर 2024-25 में 76 और वर्ष 2025-26 में मात्र 64 प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गया है। यानी 3 वर्षों में MMR में 18 अंकों की उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। इसी अवधि में मातृ मृत्यु की कुल संख्या भी घटकर 822 रह गई है। यह निरंतर गिरावट गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान एवं ट्रैकिंग, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की निगरानी, संस्थागत प्रसव, गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल तथा स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता का परिणाम है। राज्य सरकार ने मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले को एक गंभीर घटना के रूप में लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर मातृ मृत्यु की गहन समीक्षा की जाए, उसके कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधार तत्काल लागू किए जाएं।

Read More पटरी से उतरते पुल, हाईवे और एक्सप्रेस-वे

दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्र :

Read More राज काज में क्या है खास, जानें

इसी के साथ सभी चिकित्सा संस्थानों को मातृ स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकॉल की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनकी नियमित निगरानी भी की जा रही है। राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक राज्य में मातृ मृत्यु दर को कम करना आसान चुनौती नहीं थी। विशेष रूप से दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना कठिन कार्य रहा है। लेकिन राज्य सरकार ने हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष पहचान, डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध रेफरल व्यवस्था तथा विशेषज्ञ उपचार पर विशेष बल दिया है। यही कारण है कि जोखिमपूर्ण गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक चिकित्सकीय निर्देश उपचार संभव हो रहा है।

मां और नवजात की सुरक्षा :

मातृ मृत्यु दर को कम करने के प्रयासों में राजकीय चिकित्सा संस्थानों की भूमिका इस सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। राजकीय चिकित्सा संस्थानों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी पहुंचते हैं जिन्हें निजी अस्पताल अत्यधिक जटिल अथवा गंभीर स्थिति में रेफर करते हैं। अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा अन्य जटिल प्रसूति मामलों में राजकीय अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सक स्थापित चिकित्सा मानकों के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराते हैं। सिजेरियन प्रसव सहित प्रत्येक जटिल निर्णय में मां और नवजात दोनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

स्वास्थ्य एवं शिशु पोषण :

राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा है। उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर आयोजित मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु पोषण दिवस तथा प्रत्येक माह 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, जोखिम की पहचान और आवश्यक परामर्श पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं का समय रहते पता चलने लगा है। इन सकारात्मक परिणामों के पीछे चिकित्सा के आधारभूत ढांचे के विस्तार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने, आधुनिक उपकरणों की स्थापना, आवश्यक दवाओं की निरंतर उपलब्धता, रक्त की उपलब्धता, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की डिजिटल ट्रैकिंग, समयबद्ध रेफरल प्रणाली तथा गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया गया है। यही समग्र दृष्टिकोण मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान की उपलब्धियों का आधार बना है।

आयुष्मान आरोग्य योजना :

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के माध्यम से प्रदेश के 1.36 करोड़ पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 25 लाख रूपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ समन्वित इस व्यवस्था की इन्टर स्टेट पोर्टेबिलिटी के कारण अब राजस्थान के पात्र परिवार देश के किसी भी पीएम-जय से सम्बद्ध अस्पताल में गंभीर बीमारियों का भी निःशुल्क उपचार करा सकते हैं। मातृ मृत्यु दर में आई यह कमी स्वास्थ्य विभाग के साथ ही सुशासन, संवेदनशील नेतृत्व, चिकित्सा समुदाय की प्रतिबद्धता तथा लाखों आशा सहयोगिनियों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

चिकित्सकीय सलाह :

जब शासन प्रत्येक मातृ मृत्यु की समीक्षा करता है, प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला पर विशेष निगरानी रखता है और प्रत्येक संस्थागत प्रसव को सुरक्षित बनाने का प्रयास करता है, तब उसके परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होते हैं। मातृ मृत्यु का प्रत्येक मामला एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। इसलिए समाज की भी समान जिम्मेदारी है कि प्रत्येक गर्भवती महिला नियमित प्रसव पूर्व जांच कराए, संतुलित पोषण ले, चिकित्सकीय सलाह का पालन करे तथा किसी भी प्रकार की जटिलता होने पर तुरंत निकटतम सीएचसी, पीएचसी अथवा राजकीय अस्पताल से संपर्क करे।

जवाबदेह कार्यप्रणाली :

राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक गर्भवती महिला और प्रत्येक नवजात का जीवन सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर अपनाई गई संवेदनशील, वैज्ञानिक और जवाबदेह कार्यप्रणाली के प्रभाव अब परिलक्षित हो रहे हैं। मातृ स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण उपचार और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ने वाली यह समग्र नीति राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा और नई पहचान प्रदान कर रही है।

-डॉ. रवि प्रकाश

निदेशक, जनस्वास्थ्य

राजस्थान सरकार

Post Comment

Comment List

Latest News

निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को, स्वायत्त शासन विभाग ने राजनीतिक दलों को भेजे पत्र निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को, स्वायत्त शासन विभाग ने राजनीतिक दलों को भेजे पत्र
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज। निकाय प्रमुखों के पदों की आरक्षण लॉटरी 13 अगस्त को सुबह 10.30...
वन स्टेट वन इलेक्शन की तैयारी : 15 अगस्त तक तबादले पूरे करने के निर्देश, 16 अगस्त के बाद लग सकती है आचार संहिता
जयपुर से दुबई जाने वाली फ्लाइट में रोजाना देरी, यात्रियों ने किया हंगामा
राजस्थान में बेहतर होती मातृत्त्व स्वास्थ्य व्यवस्था से मृत्यु दर में कमी
हाईकोर्ट में चुनावी कार्यक्रम पेश, 29 सितंबर को होंगे आरसीए चुनाव
सुंधाशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला, बोले- छात्र हितों की बात करने वाले रांची के प्रदर्शन पर क्यों हैं चुप
वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई : सात जिलों में फर्जी बिलिंग और अपात्र आईटीसी के मामले उजागर