तन से अलग मन की पहचान... राजस्थान में 731 लोगों ने बदली पहचान, 3 साल से भी कम समय में 493 नए ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र जारी
जेएलएन अस्पताल में हर महीने 5 से 10 लोग पहुंच रहे काउंसलिंग के लिए
अजमेर। जन्म के समय किसी की पहचान लड़की के रूप में दर्ज हुई, लेकिन वह खुद को पुरुष के रूप में महसूस करता है। समाज उसे महिला के रूप में पहचानता है, जबकि उसकी अपनी लैंगिक पहचान अलग होती है। शरीर से जुड़ी जन्म के समय दर्ज पहचान और स्वयं की अनुभूति के बीच यह अंतर आखिर क्यों होता है? क्या यह बीमारी है या इसके पीछे अन्य कारण हैं? कोटा के एक सरकारी शिक्षक के नाम और लिंग परिवर्तन के आदेश ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया है। राजस्थान में अपनी लैंगिक पहचान को कानूनी मान्यता दिलाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। दिसंबर 2023 तक प्रदेश में 238 ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाणपत्र जारी हुए थे, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 731 हो गए। यानी तीन साल से भी कम समय में 493 नए प्रमाणपत्र जारी हुए। अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भी हर महीने 5 से 10 लोग इससे संबंधित परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
मन्दौदरी चौधरी अब रुद्र जाट, शिक्षा विभाग ने दी मंजूरी :
कोटा के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय नान्ता महल में कार्यरत शारीरिक शिक्षक मन्दौदरी चौधरी का नाम अब सरकारी रिकॉर्ड में रुद्र जाट होगा। लिंग की प्रविष्टि भी महिला से पुरुष होगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने 28 अक्टूबर 2026 को इसकी स्वीकृति दी। इससे पहले वर्ष 2023 में शारीरिक शिक्षक चिंदर पाल सिंह ने भी नाम और लिंग परिवर्तन के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। उन्होंने वर्ष 2018 में शिक्षा विभाग को आवेदन दिया था। कार्रवाई नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 25 मई 2023 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
942 आवेदन, 731 को प्रमाणपत्र :
राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल के सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 942 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 731 प्रमाणपत्र जारी हुए और 64 आवेदन लंबित थे। दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने लोकसभा में 378 आवेदन और 238 प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी दी थी। यह बढ़ोतरी अपनी लैंगिक पहचान को सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कराने के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत है।

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