राजस्थान के अंतिम गांव के हालात : 78 साल बाद भी बिस्लाई गांव में नहीं पहुंचा नल का पानी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर
राजस्थान आज भी नदी से लाते हैं जीवन की बूंदें
छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आज भी बदहाली की दास्तां कह रहा है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पेयजल की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को अब भी नदी से पानी ढोकर लाना पड़ता है। महिलाएं हर रोज कई किलोमीटर दूर नदी तक जाती हैं और सिर पर मटकी रखकर परिवार के लिए पानी लाती हैं। वही नदी, जहां मवेशी स्नान करते हैं और मृत जानवरों को किनारे फेंक दिया जाता है। मजबूरी में ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना, ट्यूबवेल और टैंकर की घोषणाएं केवल कागजों में सिमट गईं। सरपंच से लेकर विधायक-सांसद तक गुहार लगाने के बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि हर चुनाव में नेताओं ने वादे किए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई इस गांव की सुध लेने तक नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।
नेता व प्रशासन की प्रतिक्रिया
बिस्लाई गांव की तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि सरकार और प्रशासन ने यहां की समस्याओं की अनदेखी की है। 78 साल बाद भी अगर ग्रामीणों को नदी से पानी ढोना पड़ रहा है तो यह सरकार की नाकामी है।
- प्रेम सिंह मीणा, कांग्रेस नेता
इस मामले का जल्द संज्ञान लिया जाएगा।
- अभिमन्यु सिंह कुंतल, उपखंड अधिकारी छीपाबड़ौद।
ग्रामीणों का दर्द उनके ही शब्दों में
आजादी को 78 साल हो गए, लेकिन हमारे गांव में आज तक नल का पानी नहीं आया। जानवर जिस नदी में नहाते हैं, उसी से हमें पीने का पानी भरना पड़ता है। .
- घनश्याम बैरवा, ग्रामीण
जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सबको कहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां फैल रही हैं।
- राम भरोस, ग्रामीण
सुबह से दोपहर तक नदी से पानी लाना हमारी मजबूरी है। बारिश में स्थिति और भी विकट हो जाती है।
- नीलू बाई, महिला ग्रामीण
बरसों से सुन रहे हैं कि नल-जल योजना आएगी, पाइप लाइन डलेगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
- सूखना बाई, महिला ग्रामीण

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