693 बांधों में 52.24 प्रतिशत पानी बचा, 227 पूरी तरह सूखे
डेढ़ माह में तेज गिरावट ने बढ़ाई चिंता
प्रदेश में जल संकट के संकेत तेजी से गहराते नजर आ रहे हैं। जल संसाधन के एक अप्रैल तक जारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के बांधों में कुल भराव क्षमता का केवल 52.24 प्रतिशत पानी शेष रह गया है।
जयपुर। प्रदेश में जल संकट के संकेत तेजी से गहराते नजर आ रहे हैं। जल संसाधन के एक अप्रैल तक जारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के बांधों में कुल भराव क्षमता का केवल 52.24 प्रतिशत पानी शेष रह गया है, जो कि 30 सितंबर 2025 के 90.50 प्रतिशत के मुकाबले बेहद चिंताजनक है। मात्र 6 महीनों में 38.26 प्रतिशत पानी कम होना आने वाले गर्मी के महीनों में गंभीर संकट का संकेत दे रहा है।
14 बांध लबालब :
गर्मियों की किल्लत से पहले स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 227 बांध पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि केवल 14 बांध ही लबालब भरे हैं। अधिकांश यानी 452 बांध आंशिक रूप से भरे हैं, जो तेजी से खाली होने की कगार पर हैं।
कहां कितना पानी ?
प्रदेश के फिलहाल 693 बांधों की कुल भराव क्षमता 13029.09 एम.क्यूएम में से 6806.39 एम.क्यूएम पानी शेष हैं। इसमें जोनवार जयपुर जोन के 186 बांधों की कुल भराव क्षमता 2473.12 एम.क्यूएम में से 1497.49 एम.क्यूएम पानी, भरतपुर के 68 बांधों में कुल भराव क्षमता 472.05 एम.क्यूएम में से 146.28 एम.क्यूएम पानी, जोधपुर के 117 बांधों में कुल भराव क्षमता 991.65 एम.क्यूएम में से 280.43 एम.क्यूएम पानी, कोटा के 81 बांधों की कुल भराव क्षमता 4475.53 एम.क्यूएम में से 2660.09 एम.क्यूएम, बांसवाड़ा के 63 बांधों की कुल भराव क्षमता 2766.06 एम.क्यूएम में से 1387.12 एम.क्यूएम और उदयपुर के 178 बांधों की कुल भराव क्षमता 1850.69 एम.क्यूएम में से 834.99 एम.क्यूएम पानी शेष हैं।
डेढ़ माह में तेज गिरावट ने बढ़ाई चिंता :
15 फरवरी से 31 मार्च के बीच जलस्तर में आई गिरावट ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। खासतौर पर कोटा और बांसवाड़ा जोन में जलस्तर सबसे तेजी से घटा है, जो भविष्य के जल संकट की चेतावनी है।

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