आर्मी की फुल ड्रेस रिहर्सल : जवानों ने दिखाए करतब, बाइक पर बनाया ह्युमन पिरामिड ; मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रदर्शन से रोमांचित हुए दर्शक

रिहर्सल में दिखी राजस्थानी कला-संस्कृति की झलक

आर्मी की फुल ड्रेस रिहर्सल : जवानों ने दिखाए करतब, बाइक पर बनाया ह्युमन पिरामिड ; मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रदर्शन से रोमांचित हुए दर्शक

राजधानी जयपुर में रविवार को आर्मी की दूसरी परेड में उमड़ा जनसैलाब भारतीय सेना के पराक्रम और अनुशासन से सराबोर हो उठा। 78वें सेना दिवस परेड 2026 की तैयारियों के तहत महल रोड जगतपुरा पर चीफ ऑफ स्टाफ की परेड के रूप में दूसरी फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया गया।

जयपुर। राजधानी जयपुर में रविवार को आर्मी की दूसरी परेड में उमड़ा जनसैलाब भारतीय सेना के पराक्रम और अनुशासन से सराबोर हो उठा। 78वें सेना दिवस परेड 2026 की तैयारियों के तहत महल रोड जगतपुरा पर चीफ  ऑफ  स्टाफ  की परेड के रूप में दूसरी फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया गया। यह रिहर्सल मुख्य परेड (15 जनवरी) से पहले की महत्वपूर्ण कड़ी थी, जिसमें हजारों की संख्या में जयपुरवासी और आसपास के लोग शामिल हुए। यह पहली बार है जब आर्मी डे परेड आर्मी कैंट क्षेत्र के बाहर शहर की सड़कों पर हो रही है, जिससे यह ऐतिहासिक घटना बन गई। सुबह करीब 8:45 बजे से दर्शकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। रजिस्टर्ड दर्शकों को विशेष सीटें आवंटित की गईं, जबकि बाकी लोग खड़े होकर इस दृश्य का आनंद लेते रहे।

परेड सुबह 10 बजे के आस-पास शुरू हुई और लगभग दोपहर साढे 12 बजे तक चली। रिहर्सल में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट्स के जवान आकर्षक वर्दी में मार्च पास्ट करते दिखे। सैनिकों की परफेक्ट सिंक्रोनाइज्ड फॉर्मेशन, बाइक पर सैनिकों के रोमांचक स्टंट और अनुशासित मार्च ने हर किसी का मन मोह लिया। इस रिहर्सल में आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मोस मिसाइल, टैंक, ड्रोन, रोबोटिक डॉग्स (रोबो डॉग्स) और अन्य उन्नत तकनीक से लैस उपकरणों ने दर्शकों में जोशभर दिया। रोबो डॉग्स ने खासा आकर्षण बटोरा, जो सेना की नई तकनीकी क्षमताओं को दर्शाते हैं। हेलीकॉप्टरों की फ्लाईपास्ट और अन्य सैन्य गतिविधियों ने आसमान को भी गौरवान्वित किया। 

सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम
रिहर्सल देखने वालों की ज्यादा भीड़ की वजह से काफी संख्या में लोगों को बैठने और खड़े होने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई। रिहर्सल के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्नाइपर्स की तैनाती, ट्रैफिक डायवर्जन और चेकपॉइंट्स के साथ पूरा इलाका सुरक्षित रहा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य था, जिससे भीड़ प्रबंधन सुचारू रहा। कई दर्शकों ने इसे दिल्ली जैसा माहौल बताया और कहा कि जयपुर में इतना भव्य सैन्य प्रदर्शन पहली बार देखा। यह रिहर्सल 9 जनवरी की पहली रिहर्सल के बाद की दूसरी प्रमुख कड़ी थी। 13 जनवरी को आर्मी कमांडर की परेड होगी, जबकि मुख्य आर्मी डे परेड 15 जनवरी को सुबह 10 बजे से महल रोड पर होगी। साथ ही शाम को एसएमएस स्टेडियम में शौर्य संध्या में 1000 ड्रोन्स का शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से भरी प्रस्तुतियां होंगी।

जवानों ने दिखाए करतब, आसमान में किया शक्ति का प्रदर्शन
रिहर्सल के दौरान सात बाइकों पर 27 जवानों ने ह्यूमन पिरामिड बनाया। सुदर्शन चक्र जैसी आकृति भी बनाई। इस दौरान मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर दिखाया गया। यह 20 सेंकेड में एक साथ 40 से ज्यादा रॉकेट दाग सकता है। भारतीय सेना ने अपाचे एएच-64ई, चीता और चेतक हेलिकॉप्टर से भी आसमान में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। के-9 वज्र टैंक आकर्षण का केन्द्र रहा जो 45 किमी दूर तक दुश्मन ठिकानों को नेस्तानाबूद कर सकता है। तीन सौ किमी तक मार करने वाले रॉकेट लॉन्चर की खूबियों से भी लोग रूबरू हुए। भैरव बटालियन ने रिहर्सल के दौरान बहादुरी का प्रदर्शन किया। 15 जनवरी को आर्मी डे परेड में शामिल होने वाली घुडसवार बटालियन ने भी रिहर्सल की। भारतीय सेना के बैंड ने शानदार प्रस्तुति दी। एक ही ड्रेस में कदमताल करते सैनिकों को देख दर्शक तालियां बजाने लगे। 

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रिहर्सल में दिखी राजस्थानी कला-संस्कृति की झलक
सेना की 15 जनवरी को आर्मी डे परेड में इस बार राजस्थान की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की झांकी भी पधारो म्हारे देश संस्कृति की ओर देशभर का ध्यान आकर्षित करेगी। जगतपुरा में चल रही रिहर्सल में यह झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग की ओर से तैयार इस झांकी की थीम राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर, कला, शिल्प और लोक उत्सव रखी गई है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की सदियों पुरानी परंपराओं, वास्तुकला, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को एक ही मंच पर पेश करना है। झांकी में कठपुतली की आकृति, टेराकोटा शैली में बनी धार्मिक ओर सांस्कृतिक मूर्तियां, जयपुर की ब्लू पॉटरी के बर्तन, भरतपुर की प्रसिद्ध फूलों की होली लोक नृत्य के साथ ही कई ऐतिहासिक महलों की स्थापत्य शैली को दर्शाया गया है।  

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