पुलिस की छवि और व्यवहार में सुधार पर विचार-मंथन, आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर
पुलिस सुधार के लिए आत्मचिंतन और संवेदनशीलता जरूरी
जयपूर। पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कार्यक्रम का परिचय एवं रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पारंपरिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने संभागियों से सभी विषयों पर खुलकर विचार साझा करने का आह्वान किया। साथ ही, पुलिस सुधार के लिए पूर्व में किए गए प्रयासों की जानकारी भी दी।
पुलिसिंग के साथ छवि और व्यवहार में सुधार जरूरी: डीजीपी
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि यह कोई औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी तरह का पहला और अनूठा प्रयास है। विचार-मंथन के माध्यम से तैयार किए गए इस मॉड्यूल का उद्देश्य पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं के साथ पुलिस की छवि और व्यवहार में सुधार पर चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए। पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी, त्वरित एवं कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता और लगातार सामने आने वाली नई चुनौतियों के बीच कार्य करना पड़ता है। ऐसे में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए आमजन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना बेहद आवश्यक है।
डीजीपी ने कहा कि आमजन अपनी परेशानी और समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पुलिस के पास आता है। ऐसे में पुलिसकर्मियों का प्रयास होना चाहिए कि वे उसकी बात को संवेदनशीलता के साथ सुनें तथा विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए समस्या के समाधान और राहत प्रदान करने की दिशा में प्रभावी प्रयास करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशीलता का अर्थ शिथिलता नहीं है, बल्कि कानून के अनुरूप पीड़ित या परिवादी को राहत प्रदान करने की मंशा है। पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करना चाहिए।
डीजीपी शर्मा ने संभागियों से आह्वान किया कि वे इन सभी विषयों पर गंभीरता से विचार करें और अपने अनुभव साझा करें, ताकि विचार-विमर्श के माध्यम से पुलिसिंग, व्यवहार और जनविश्वास को बेहतर बनाने के प्रभावी रास्ते तलाशे जा सकें।

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