हार से नहीं, अभ्यास से बनता है चैंपियन : विश्वनाथन आनंद ने चारबाग में खोले शतरंज और जीवन के राज, बच्चों को दिया मैसेज
हार से घबराएं नहीं, प्रैक्टिस को बनाएं आदत
चेन्नई के चहलकदमी भरे शतरंज हॉल से लेकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचने वाले भारत के पहले ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने कहा कि चैंपियन बनने की राह जीत से नहीं, लगातार अभ्यास और सीखने की जिज्ञासा से होकर गुजरती है।
जयपुर। चेन्नई के चहलकदमी भरे शतरंज हॉल से लेकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचने वाले भारत के पहले ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने कहा कि चैंपियन बनने की राह जीत से नहीं, लगातार अभ्यास और सीखने की जिज्ञासा से होकर गुजरती है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तहत सुबह चारबाग में आयोजित लाइटनिंग किड सेशन में आनंद ने बच्चों और युवा पाठकों के साथ अपनी जीवन यात्रा, शतरंज के रोमांच और सोचने की कला के रहस्य साझा किए। आनंद ने बताया कि बचपन में वे तेज गति से खेलने के लिए जाने जाते थे। यही तेजी आगे चलकर उनकी पहचान बनी। उपन्यासकार राहुल भट्टाचार्य के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि शतरंज ने उन्हें सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन के अहम सबक सिखाए धैर्य, अनुशासन और सही समय पर सही फैसला लेने की कला। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर आनंद ने संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि वे हर सवाल का जवाब एआई से नहीं खोजते। “एआई आपको जवाब दे सकता है, लेकिन किसी समझदार इंसान के जवाब के पीछे का लॉजिक जानना ज्यादा जरूरी है। लाइटनिंग किड सेशन में उन्होंने खेल के प्रति अपने एटीट्यूड और गुस्से को लेकर भी खुलकर बात की। आनंद ने बताया कि पिछले 35 वर्षों में उन्होंने कभी खेल से पहले या दौरान अपने विरोधी से बातचीत नहीं की। उनका मानना है कि बोर्ड पर ध्यान और मानसिक संतुलन ही असली ताकत है।
बच्चों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए आनंद ने कहा कि प्रैक्टिस का कोई विकल्प नहीं है। मैं भी कई गेम हारा हूं। एक समय ऐसा भी आया जब लगातार तीन मैच हारे, लेकिन हार पर नहीं रुका, सिर्फ अभ्यास को प्राथमिकता दी,” उन्होंने कहा। आनंद ने अपने करियर में माता-पिता की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में शतरंज उनकी मां की वजह से आया। वही मुझे हर टूर्नामेंट में लेकर जाती थीं। माता-पिता का सहयोग बच्चे के करियर को आकार देता है, आनंद ने कहा। चारबाग का यह सेशन बच्चों के लिए सिर्फ शतरंज की क्लास नहीं, बल्कि जीवन में सीखते रहने और जिज्ञासा बनाए रखने का संदेश बनकर उभरा।

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