रेलवे पार्सल ट्रांस-शिपमेंट के नियमों में बदलाव, अब इंटरमीडिएट स्टेशनों पर भी बदल सकेंगे पार्सल ट्रेन
मंडलों में कई छोटे-मोटे स्टेशनों पर पार्सल बुकिंग
भारतीय रेलवे ने पार्सल परिवहन को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। अब पार्सल का ट्रांस-शिपमेंट इंटरमीडिएट स्टेशनों पर भी अनुमति दी गई है। पहले यह सुविधा केवल ब्रेक-ऑफ-गेज स्टेशनों तक सीमित थी।
जयपुर। भारतीय रेलवे ने पार्सल परिवहन को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब पार्सल का ट्रांस-शिपमेंट (ट्रेन बदलना) इंटरमीडिएट स्टेशनों पर भी अनुमति दी गई है। पहले यह सुविधा केवल ब्रेक-ऑफ-गेज स्टेशनों तक सीमित थी। नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू होगा। इस बदलाव का खास फायदा उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और अजमेर मंडलों को मिलने वाला है, जहां राजस्थान के कई महत्वपूर्ण रूटों पर डायरेक्ट ट्रेनों की कमी है। अब तक पार्सल ट्रांस-शिपमेंट की अनुमति सिर्फ ब्रेक-ऑफ-गेज स्टेशनों पर थी। अन्य इंटरमीडिएट स्टेशनों पर पार्सल को एक ट्रेन से उतारकर दूसरी ट्रेन में चढ़ाने की इजाजत नहीं थी। नतीजतन, जहां डायरेक्ट ट्रेन उपलब्ध नहीं थी, वहां कस्टमर को पार्सल भेजने में काफी परेशानी होती थी।
उत्तर पश्चिम रेलवे के चार मंडलों जयपुर, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में पार्सल एवं लगेज से कुल 69.39 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जो पिछले वर्ष (61.98 करोड़ रुपये) की तुलना में 11.94% अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इन मंडलों में पार्सल बिजनेस लगातार बढ़ रहा है, लेकिन डायरेक्ट ट्रेन न होने के कारण कई गंतव्यों तक सीमित रह जाता था। जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और अजमेर मंडल मुख्य रूप से पैसेंजर और कुछ फ्रेट ट्रैफिक वाले क्षेत्र हैं, जहां पर्यटन, कृषि उत्पाद, सीमेंट, नमक और कंटेनर ट्रैफिक प्रमुख है। इन मंडलों में कई छोटे-मोटे स्टेशनों पर पार्सल बुकिंग होती है, लेकिन ट्रांस-शिपमेंट की कमी के कारण बिजनेस की पूरी क्षमता नहीं निकल पाती थी।

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