हंसी के तीर, व्यंग्य की धार के साथ 'कॉन्स्टिट्यूशन' क्लब में सजा व्यंग्य विहास का रंगा-रंग महोत्सव, न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छावा भी कार्यक्रम में उपस्थित

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई

हंसी के तीर, व्यंग्य की धार के साथ 'कॉन्स्टिट्यूशन' क्लब में सजा व्यंग्य विहास का रंगा-रंग महोत्सव, न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छावा भी कार्यक्रम में उपस्थित

शब्दों की ऐसी आतिशबाजी हुई, जिसमें ठहाकों के बीच समाज का आईना भी चमकता नजर आया। विधानसभा के समीप स्थित कॉ्स्टिटट्यूशन क्लब में पहली बार आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य उत्सव व्यंग्य विहास ने जयपुर को गद्य व्यंग्य का नया मंच दे दिया। माहौल कुछ ऐसा था जैसे कवि सम्मेलन हो, बस फर्क इतना कि यहां तुकों की जगह तीखे गद्य और तालियों की जगह ठहाकों की गूंज थी।

जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर में गुरुवार को शब्दों की ऐसी आतिशबाजी हुई, जिसमें ठहाकों के बीच समाज का आईना भी चमकता नजर आया। विधानसभा के समीप स्थित कॉ्स्टिटट्यूशन क्लब में पहली बार आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य उत्सव व्यंग्य विहास ने जयपुर को गद्य व्यंग्य का नया मंच दे दिया। माहौल कुछ ऐसा था जैसे कवि सम्मेलन हो, बस फर्क इतना कि यहां तुकों की जगह तीखे गद्य और तालियों की जगह ठहाकों की गूंज थी। राजस्थान साहित्य अकादमी, दैनिक नवज्योति और हास्य लोक के सहयोग से हुए इस अनूठे आयोजन का उद्देश्य हिंदी गद्य की वाचिक परंपरा को सहेजना और समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य की धार को और पैना करना रहा। देश के छह नामचीन व्यंग्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं से सत्ता, समाज, व्यवस्था और आम आदमी की पीड़ा को व्यंग्य में लपेटकर पेश किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। पूर्व न्यायाधीश मनीष भंडारी, पिलकेन्द्र अरोड़ा, प्रभात गोस्वामी, अशोक राही और अजय अनुरागी का स्वागत दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी, पूर्व संपादक महेश शर्मा, पीके मस्त, राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी और संजय झाला ने किया। कार्यक्रम में न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छावा भी उपस्थित थे।

मंच पर जैसे ही शब्दों का सिलसिला शुरू हुआ, हर व्यंग्य पंक्ति पर तालियों और ठहाकों का शोर गूंज उठा। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध हास्य कवि अरुण जैमिनी ने अपनी चिर-परिचित चुटीली शैली में किया, जबकि सह-संचालन अरुण जोशी ने संभाला। आयोजन संयोजक और लोकप्रिय हास्य-व्यंग्यकार संजय झाला ने बताया कि व्यंग्य विहास उस गंभीर और वैचारिक व्यंग्य परंपरा को मंच देने का प्रयास है, जो हंसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। इस अवसर पर वैद्य भगवान सहाय झाला की स्मृति में प्रथम व्यंग्य-विहास सम्मान लखनऊ के वरिष्ठ व्यंग्यकार सूर्यकुमार पाण्डेय को प्रदान किया गया। वेद-शास्त्रों के मर्मज्ञ, बहुभाषाविद् और संवेदनशील समाजसेवी वैद्य भगवान सहाय झाला की स्मृति में आयोजित यह सम्मान समारोह व्यंग्य साहित्य के माध्यम से वैचारिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ। 

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