राजस्थान विधानसभा में धर्मांतरण प्रतिषेध विधेयक 2025 पर हंगामे के बीच बहस, पक्ष-विपक्ष में तीखे तर्क
बिल से पुलिस की मनमानी बढ़ेगी
राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 पर विपक्ष के हंगामे के बीच बहस हुई।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 पर विपक्ष के हंगामे के बीच बहस हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने अपने-अपने तर्क रखते हुए बिल की आवश्यकता और प्रभावों पर चर्चा की। बहस की शुरुआत आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग ने की। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को इतना कड़ा कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि भारत सरकार के कानून में इतनी बड़ी जुर्माना राशि का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बिल से पुलिस की मनमानी बढ़ेगी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। गर्ग ने यह भी कहा कि आदिवासियों का स्वतंत्र धर्म कोड रहा है और उनका धर्मांतरण सीधे हिंदू धर्म से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। वहीं, निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि भोले-भाले आदिवासियों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा है, जिसे रोकना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में कभी दंगे नहीं हुए और लोग साझा संस्कृति में रहते हैं, लेकिन आज वोट की राजनीति में जहर घोला जा रहा है। भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने लव जिहाद के जरिए शादियां की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई मिशनरियों को विदेश से फंडिंग मिल रही है, जिसे रोकने के लिए नया कानून आवश्यक है। वहीं, भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व में 75 प्रतिशत लोग ईसाई बन चुके हैं, अब राजस्थान में भी ऐसी स्थिति रोकने के लिए यह कानून जरूरी है। सदन में हुई चर्चा के बाद माना जा रहा है कि 1966 के बाद यह बिल एक बार फिर विधानसभा में पास होगा। इसके लागू होने से प्रदेश में सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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