कोर्टेवा और बीएएसएफ ने सरसों उत्पादन बढ़ाने के लिए पेश की नई तकनीक, खाद्य तेलों में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण

समर्पित सरसों किसानों के लिए एक अहम् पड़ाव

कोर्टेवा और बीएएसएफ ने सरसों उत्पादन बढ़ाने के लिए पेश की नई तकनीक, खाद्य तेलों में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण

कोर्टेवा इंडिया ने बीएएसएफ इंडिया के साथ रणनीतिक साझेदारी में सरसों की फसल के लिए नया क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च। यह एक नॉन-जीएम फसल प्रणाली है, जो खरपतवार नियंत्रण को बेहतर बनाकर और उपज की संभावना बढ़ाकर सरसों की खेती को मजबूत करने का लक्ष्य रखती।

जयपुर। कोर्टेवा इंडिया ने बीएएसएफ इंडिया के साथ रणनीतिक साझेदारी में सरसों की फसल के लिए नया क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च किया है। यह एक नॉन-जीएम फसल प्रणाली है, जो खरपतवार नियंत्रण को बेहतर बनाकर और उपज की संभावना बढ़ाकर सरसों की खेती को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है। देश में 40 लाख टन से अधिक उत्पादन के साथ सरसों खाद्य तेल देने वाली फसलों में अहम स्थान रखती है। भारतीय किसान हर साल 80 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती करते हैं। हालाँकि, ओरोबंकी जैसे परजीवी खरपतवार बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जो 50 प्रतिशत तक उपज का नुकसान कर सकते हैं। कई बार गंभीर संक्रमण की स्थिति में पूरी फसल भी नष्ट हो सकती है। ऐसे में, प्रभावी खरपतवार प्रबंधन न सिर्फ उत्पादन बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि खाद्य तेलों में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। क्लियरफील्ड टेक्नोलॉजी, जिसमें किफिक्स हर्बिसाइड शामिल है, बीएएसएफ का एक स्वामित्वाधिकार (प्रोप्रायटरी) नवाचार है, जो ओरोबैंके जैसे कठिन खरपतवारों के विरुद्ध व्यापक एवं चयनात्मक नियंत्रण प्रदान करने के लिए जाना जाता है।

इस प्रणाली के मूल में कॉर्टेवा की उन्नत और उच्च उपज देने वाली आनुवंशिक किस्में शामिल हैं, जिन्हें बीएएसएफ के क्लियरफील्ड शाकनाशी-सहिष्णु गुण (ट्रेट) के साथ एकीकृत किया गया है। क्लियरफील्ड गुण के साथ विकसित की गई सरसों की बीज किस्में गैर-ट्रांसजेनिक और गैर-आनुवंशिक रूप से परिवर्तित हैं, जिन्हें पारंपरिक पौध-प्रजनन तकनीकों के माध्यम से विकसित किया गया है। ये बीज कॉर्टेवा की ओर से विशेष रूप से ‘पायनियर’ ब्रांड के तहत बेचे जाएंगे, जिससे किसानों को सरसों की खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और नवाचारी समाधान उपलब्ध होंगे। इस अवसर पर कृषि, उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजस्थान भारत में सरसों उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हमारे किसान ओरोबैंके जैसे कीटों और खरपतवारों से भारी दबाव का सामना करते हैं। कॉर्टेवा और बीएएसएफ की क्लियरफील्ड सरसों उत्पादन प्रणाली एक स्वागतयोग्य नवाचार है। यह हमारे सरसों उत्पादकों के लिए राहत और समृद्धि का आश्वासन देती है, कृषि उत्पादकता को बढ़ाती है, स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करती है और किसानों की आजीविका की रक्षा करती है।

बीएएसएफ एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के निदेशक गिरिधर रणुवा ने कहा कि हम भारत के सरसों किसानों के लिए क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च करते हुए बेहद खुश हैं। खेती दुनिया का सबसे बड़ा कार्य है, और यह क्षण हमारे किसानों तथा भारतीय कृषि के भविष्य के प्रति हमारी वर्षों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  मैं इस परियोजना से जुड़े सभी भागीदारों का भरोसे और सहयोग के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। आपके समर्थन से ही हम ऐसी तकनीकें ला पा रहे हैं, जो सच में फर्क डालती हैं, किसानों को खरपतवार नियंत्रण में मदद करती हैं और हमारी महत्वपूर्ण तिलहन फसलों में से एक की पैदावार को सुरक्षित रखती हैं।

कोर्टेवा एग्रीसाइंस के साउथ एशिया अध्यक्ष सुब्रतो गीद ने कहा कि क्लियरफील्ड सरसों प्रोडक्शन सिस्टम भारतीय कृषि, खासकर हमारे समर्पित सरसों किसानों के लिए एक अहम् पड़ाव है। क्लियरफील्ड सरसों में कोर्टेवा की विज्ञान आधारित नवाचार एक मजबूत समाधान पेश करती है। यह लाभकारी सरसों खेती के लिए नया मानक तय करता है और किसानों को बेहतर औजार देकर उनकी सफलता और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

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