राजस्थान में सूखा, 14 जिलों की 80 तहसीलें अभावग्रस्त घोषित
अकाल जैसे हालात पैदा हो गए
जयपुर। राजस्थान में मानसून की बेरुखी और औसत से कम बारिश के चलते कई जिलों में अकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं। फसलों को हुए नुकसान और पानी की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने रविवार को बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। इनमें जोधपुर की सर्वाधिक 12 तहसीलें, जालोर और बाड़मेर की 10-10, बालोतरा की 9, पाली की 8, डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी की 7-7, बांसवाड़ा की 3, ब्यावर, चूरू और बीकानेर की 2-2 तथा नागौर और सिरोही की 1-1 तहसील शामिल हैं। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के अनुसार, प्रदेश के कई हिस्सों में अकाल के हालात को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोले जाएंगे और किसानों-पशुपालकों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
किसानों को मिलेगी राहत :
राजस्थान प्रभावित क्षेत्र (कार्यवाहियों का निलंबन) अधिनियम, 1952 के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में निर्धारित शर्तों के अनुसार किसानों को ऋण वसूली संबंधी राहत मिल सकती है। इसमें कुछ वसूली कार्रवाइयों और कृषि भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं पर रोक का प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि, यह राहत सभी प्रकार के ऋणों पर स्वत: लागू नहीं मानी जा सकती। इसकी अवधि और पात्रता सरकारी आदेश से तय होगी।
कृषि अनुदान मिलेगा :
सूखे के कारण फसल को निर्धारित सीमा तक नुकसान होने पर पात्र किसानों को राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के नियमों के अनुसार कृषि आदान-अनुदान मिल सकता है। इसके लिए गिरदावरी रिपोर्ट, नुकसान का आकलन और निर्धारित पात्रता जरूरी होगी। अनुदान की राशि लागू सरकारी मानकों के अनुसार तय की जाएगी।

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