इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल से लोगों के बीच चर्चा : अचानक मोबाइल पर तेज अलार्म और स्क्रीन पर फ्लैश से कुछ पल के लिए घबरा गए, बोले- थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव

थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव

इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल से लोगों के बीच चर्चा : अचानक मोबाइल पर तेज अलार्म और स्क्रीन पर फ्लैश से कुछ पल के लिए घबरा गए, बोले- थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव
एनडीएमए के इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल ने लोगों को चौंका दिया। तेज अलार्म और फ्लैश मैसेज से कई लोग घबरा गए, हालांकि बाद में इसे ट्रायल समझ आया। विशेषज्ञों ने पहल को सराहा, लेकिन जागरूकता और स्थानीय भाषा की कमी सामने आई। सही उपयोग पर यह सिस्टम आपदा में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

जयपुर। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से 2 मई को देशभर में किए गए इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल ने आम लोगों के बीच व्यापक चर्चा और मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा कीं। इस परीक्षण का उद्देश्य आपदा या आपात स्थिति में लोगों तक त्वरित और प्रभावी सूचना पहुंचाने की व्यवस्था को परखना था, लेकिन इसका अनुभव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रहा।

लगा फोन में खराबी हो गई

जयपुर जिले में कई लोगों ने बताया कि अचानक मोबाइल पर तेज अलार्म जैसी आवाज और स्क्रीन पर फ्लैश संदेश आने से वे कुछ पल के लिए घबरा गए। महात्मा गांधी अस्पताल के नर्सिंगकर्मी मोहित शर्मा ने कहा कि पहले तो लगा कि फोन में कोई बड़ी खराबी आ गई है या कोई गंभीर खतरा है।

थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव

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बाद में समझ आया कि यह सिर्फ  ट्रायल है। आईटी एक्सपर्ट महेन्द्र शर्मा ने इसे जरूरी, लेकिन थोड़ा डराने वाला अनुभव बताया।

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सकारात्मक रहा कदम

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शहरी इलाकों में तकनीक के जानकार लोगों ने इस पहल की सराहना की। टैक एक्सपर्ट प्रतापसिंह राठौड़ के अनुसार इस तरह की सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली विदेशों में पहले से है। भारत में इसका लागू होना सकारात्मक कदम है, हालांकि लोगों को पहले से जागरूक करना चाहिए था।

स्थानीय भाषा में हो तो बेहतर होता

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिक्रिया थोड़ी अलग रही। बस्सी के कानड़वास गांव से किसान कन्हैयालाल ने बताया कि उन्हें संदेश समझने में दिक्कत हुई क्योंकि अलर्ट अंग्रेजी में भी था। आवाज बहुत तेज थी, लेकिन संदेश पूरी तरह समझ नहीं आया। अगर यह पूरी तरह स्थानीय भाषा में होता तो बेहतर रहता। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बहुभाषी संचार इस तरह की प्रणालियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

बाद में समझा कि अलर्ट मैसेज है

जयपुर नगर निगम के निर्वतमान पार्षद रजत विश्नोई ने कहा कि इस मैसेज को देखकर वह एक बार तो बुरी तरह घबरा गया था। बाद में समझ आया कि इस पर रियक्ट नहीं करना है, यह अलर्ट मैसेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रायल ने तकनीकी रूप से सिस्टम की क्षमता को साबित किया है, लेकिन जनजागरूकता की कमी साफ  दिखी। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे अलर्ट से पहले व्यापक सूचना अभियान चलाना चाहिए, ताकि लोग समझ सकें कि यह घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की सूचना है। कुल मिलाकर, यह इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल एक अहम पहल साबित हुई, जिसने न केवल तकनीकी ढांचे की मजबूती को परखा बल्कि यह भी दिखाया कि आम लोगों को इस प्रणाली से जोड़ने के लिए जागरूकता और भाषा की पहुंच पर और काम करने की जरूरत है। लोगों ने सोशल मीडिया पर मजाकिया प्रतिक्रियाएं भी दीं। कई यूजर्स ने इसे अचानक हॉरर मूवी जैसा अनुभव बताया, कई लोगों ने कहा कि यह वास्तविक आपदा के समय उपयोग में लाया जाए तो यह जान बचाने में बेहद कारगर हो सकता है।

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