अंतरिम बजट से उम्मीदें: इनकम टैक्स, जीएसटी, रिटेल और एमएसएमई सुविधाओं का हो विस्तार
फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (फोर्टी) की ओर से मांग पत्र केन्द्र को भेजा गया
ब्यूरो/नवज्योति,जयपुर। औद्योगिक एवं व्यापारिक वर्ग एक फरवरी को संसद में प्रस्तुत होने वाले अंतरिम बजट का बेताबी से इंतजार कर रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन एवं प्राथमिकताओं के अनुसार अंतरिम बजट में खुदरा व्यापार एवं लघु उद्योगों सहित अर्थव्यवस्था के सेक्टरों में वृद्धि के लिए मजबूत नीतियों की घोषणा होगी। फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (फोर्टी) की ओर से मांग पत्र केन्द्र को भेज दिया गया है।
रिटेल ट्रेड को बढ़ावा मिलेगा
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य और कैट के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष गोयल ने कहा कि बजट मे आर्थिक विकास पर जोर दिए जाने की उम्मीद हैं तथा व्यापारों के लिए कर सुधार या प्रोत्साहन के माध्यम से खुदरा व्यापार को भी बढ़ावा दिए जाने की आशा है। व्यापारी उम्मीद करते हैं कि ऐसे कदम उठाए जाएँगे जो उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देनेए व्यापार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक साकारात्मक वातावरण पैदा करने में सहायक हों।
ई-ट्रेड नीतियों पर स्पष्टता का इंतजार
जयपुर व्यापार महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश सैनी ने कहा कि ई-कॉमर्स नियमों और डिजिटल व्यापार नीतियों पर स्पष्टता का बड़ा इंतजार है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की बढ़ती महत्वपूर्णता के साथ, व्यापारिक समुदाय संतुलित प्रतिस्पर्धा के साथ वृद्धि के अवसरों को बनाए रखने के लिए एक विनियमन ढांचा चाहता है जिसकी घोषणा बजट में हो।
एमएसएमई इकोनॉमी की रीढ़, इस पर विशेष फोकस की जरूरत
-फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि एमएसएमई को विशेष फोकस दिया जाना चाहिए। इकोनोमी की रीढ यही क्षेत्र है। केन्द्र सरकार को मांग पत्र भेजा है।
-कुल आय की मूल छूट सीमा को मौजूदा सीमा से बढ़ाकर दस लाख किया जाए।
-आईटी एक्ट, 1961 धारा 80सी के अंतर्गत कटौती सीमा मौजूदा 1,50,000 रु. से बढ़ाकर 2,50,000 कर दिया जाए।
-स्व-अधिकृत संपत्ति के लिए आयकर अधिनियम, 1961 कर धारा24बी में कटौती की सीमा मौजूदा सीमा दो लाख से बढ़ाकर साढे तीन लाख रु. की जाए।
-धारा 80जीजी की कटौती सीमा में वृद्धि की जाए।
-नाबालिग की आय की छूट सीमा बढ़ाई जाए।
-टीडीएस की दरों को तर्कसंगत किया जाए।
-सीआईटी(ए) में अपील के निपटारे के लिए सांविधिक सयम सीमा लागू हो।
-सीमा शुल्क बकाया निपटान योजना शुरू की जाए।

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