आदेश की पालना 14 दिन में करो, नहीं तो पेश हों पंचायती राज सचिव : हाईकोर्ट
अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए आदेश
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 साल पहले दिए आदेश की पालना नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने दो सप्ताह में राज्य सरकार को पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने कहा है कि यदि इस दौरान आदेश की पालना नहीं होती है तो पंचायती राज सचिव पेश होकर इस संबंध में जवाब दें। जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने यह आदेश भगवान की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अवमानना याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि प्रार्थी पूर्व में ग्राम सेवक पद पर कार्यरत था। उसकी प्रथम नियुक्ति एवं ज्वाइनिंग तिथि 9 जनवरी 1997 थी, लेकिन विभाग ने वरिष्ठता सूची में उसकी ज्वाइनिंग एक सितंबर 1997 कर दी।
इसके चलते प्रार्थी से जूनियर ग्राम सेवक सीनियर हो गए और उन्हें उसी आधार पर पदोन्नति दी गई। इसे याचिकाकर्ता ने साल 2013 में सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी। अधिकरण ने उसकी अपील मंजूर कर 8 मार्च 2014 को आदेश जारी कर विभाग को याचिकाकर्ता की वरिष्ठता को संशोधित करते हुए पदोन्नति आदेश जारी करने को कहा। इस आदेश की पालना नहीं होने पर अधिकरण ने इसे अवमानना मानते हुए साल 2023 में मामला हाईकोर्ट को रेफर कर दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने उसकी सीनियरिटी तो निर्धारित कर दी, लेकिन पदोन्नति नहीं दी। याचिकाकर्ता ने ने कहा कि उससे जूनियर कई कर्मचारी पदोन्नत होकर विकास अधिकारी बन गए हैं, लेकिन 12 साल से आदेश की पालना नहीं होने पर उसे पदोन्नति नहीं मिल पाई है। इसलिए आदेश का पालन कराया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने दो सप्ताह में आदेश की पालना नहीं होने पर पंचायती राज सचिव को हाजिर होने को कहा है।

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