प्रदेश में पहली बार एयर लिफ्ट कर अंगों को लाया गया, इस वर्ष का यह 13 वां अंगदान

ब्रेन डेड व्यक्ति के आठ अंगों का सफलतापूर्व प्रत्यारोपण

प्रदेश में पहली बार एयर लिफ्ट कर अंगों को लाया गया, इस वर्ष का यह 13 वां अंगदान

प्रदेश में पहली बार लंग्स का प्रत्यारोपण किया गया।

जयपुर। प्रदेश में पहली बार एक ब्रेन डेड व्यक्ति के आठ अंगों का प्रत्यारोपण किया गया। इस लिहाज से भी पहला अवसर रहा, जब एक ही व्यक्ति के लंग्स और हृदय का प्रत्यारोपण एक ही रोगी को किया गया। साथ ही, प्रदेश में पहली बार लंग्स का प्रत्यारोपण किया गया। अंगों को झालावाड़ से हेलीकॉप्टर से एसएमएस अस्पताल भेजकर सफ लतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान ने अंगदान की इस प्रक्रिया में एयर एम्बुलेंस के लिए आवश्यक प्रक्रिया को पूरा करवाया, जिससे यह अंगदान एवं प्रत्यारोपण सफ लतापूर्वक हो सका। इस वर्ष का यह 13 वां अंगदान था। 

कौन-कैसे हुआ ब्रेन डेड:  विष्णु प्रसाद (33) को गम्भीर रूप से घायल हो जाने पर 11 दिसंबर को झालावाड़ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद विष्णु को बचा पाना सम्भव नहीं हो पाया। विष्णु को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ब्रेन डेड घोषित हो जाने के बाद विष्णु के परिवारजन को अंगदान के बारे में प्रेरित किया गया। परिवार विष्णु के अंगों दोनों किडनियां, लिवर, हार्ट, लंग्स व दोनों कॉर्निया को दान करने के लिए सहमत हो गया। इसमें नोडल अधिकारी डॉ. रामसेवक ने अहम भूमिका निभाई। 

हेलीकॉप्टर की सहायता से झालावाड़ से जयपुर आए अंग: पहली बार हेलीकॉप्टर से अंगों को झालावाड़ से सवाई मानसिंह चिकित्सालय में प्रत्यारोपण के लिए लाया गया। एक किडनी व लिवर का प्रत्यारोपण एम्स जोधपुर में किया गया, एम्स जोधपुर में भी अंगों को झालावाड़ से जोधपुर हवाई जहाज के माध्यम से ले जाया गया। डॉ. मनीष अग्रवाल ने एसएमएस हॉस्पिटल में समन्वय के रूप में कार्य किया और एम्स में डॉ. शिवचरण नवारिया की विशेष भूमिका रही।

इनका रहा विशेष योगदान : एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी एवं समुचित प्राधिकारी डॉ. रश्मि गुप्ता, एसएमएस में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ.मनीष अग्रवालए का विशेष योगदान रहा। अंगों का आवंटन स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के माध्यम और समन्वय से किया गया, जिसमें सोटो पदाधिकारी डॉ. मृणाल, डॉ.अजीत, डॉ. धर्मेश और रोशन की अहम भूमिका रही। इस कार्य में नोटो के निदेशक डॉ.अनिल कुमार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

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